22 पंचायतों की नशा निवारण समितियों के साथ उपायुक्त ने किया गहन संवाद
Kangra, Sanjeev Mahajan-:कांगड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में चिट्टा सहित सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को और अधिक सख्त व प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में विधानसभा क्षेत्र इंदौरा में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा की अध्यक्षता में नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक का उद्देश्य नूरपुर पुलिस जिला क्षेत्र में चल रहे एंटी-ड्रग अभियान को संगठित, परिणामोन्मुख और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना रहा।
उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशे की समस्या से निपटना केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस और आमजन के समन्वित प्रयासों से ही चिट्टे जैसी गंभीर समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।बैठक में पुलिस अधीक्षक नूरपुर कुलभूषण वर्मा, एसडीएम नूरपुर अरुण शर्मा, एसडीएम ज्वाली नरेंद्र जरयाल, एसडीएम फतेहपुर विश्रुत भारती, एसडीएम इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा नूरपुर पुलिस जिला की 22 पंचायतों की नशा निवारण समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहे।
उपायुक्त ने जानकारी दी कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश स्तर पर नशे के खिलाफ एक सशक्त अभियान चलाया जा रहा है। शिमला, धर्मशाला और हमीरपुर में आयोजित एंटी-चिट्टा रैलियों के बाद अब जिला स्तर पर रेड जोन के रूप में चिन्हित पंचायतों में नशा निवारण समितियों का गठन किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।बैठक के दौरान उपायुक्त ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से उनके क्षेत्रों में नशे की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावित समाधान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने समितियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने इलाकों में नशे की मांग (डिमांड साइड) और आपूर्ति (सप्लाई साइड) दोनों पर समान रूप से कार्य करें।
डिमांड साइड पर फोकस करते हुए उपायुक्त ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा तथा सकारात्मक वातावरण का निर्माण बेहद आवश्यक है। इसके लिए पंचायत स्तर पर खेल मैदानों, युवा क्लबों और सामाजिक कार्यक्रमों को सक्रिय किया जाएगा।वहीं सप्लाई साइड को तोड़ने के लिए नशा निवारण समितियों को अपने क्षेत्रों में बाहरी, संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर उसे तुरंत पुलिस प्रशासन के साथ साझा करने को कहा गया, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो सके।
उपायुक्त ने यह भी निर्णय बताया कि प्रत्येक नशा निवारण समिति दो सप्ताह में एक बैठक आयोजित करेगी, जबकि एसडीएम स्तर पर मासिक समीक्षा बैठक होगी। इससे अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी और आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जा सकेंगे।उन्होंने कहा कि नशा उन्मूलन अभियान को जन आंदोलन का रूप देने के लिए उप-मंडल स्तर पर एंटी-चिट्टा वॉकथॉन आयोजित की जाएंगी। इससे आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नशे के विरुद्ध सकारात्मक माहौल बनेगा।
उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार सख्त कानून प्रवर्तन के साथ-साथ नशे से प्रभावित व्यक्तियों की काउंसलिंग, उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। स्कूलों और कॉलेजों में एंटी-ड्रग क्लब, प्रहरी क्लब और साथी शिक्षा कार्यक्रमों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी को समय रहते नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शीघ्र ही राज्य सरकार “चिट्टा सूचना इनाम योजना” शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत चिट्टा से संबंधित सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाएगा। कोई भी नागरिक 112 नंबर पर कॉल करके या नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दे सकता है।उपायुक्त ने अंत में युवाओं, अभिभावकों, पंचायती राज संस्थाओं, महिला मंडलों और स्वयंसेवी संगठनों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार युवाओं के सुरक्षित भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नशे के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर दृढ़ता से कार्य कर रही है।