नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जिनेवा स्थित भारतीय स्थायी दूतावास में तैनात रहे एक पूर्व लेखा अधिकारी मोहित द्वारा दो लाख स्विस फ्रैंक (करीब दो करोड़ रुपये) से अधिक की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल उसने अपने क्रिप्टो और ऑनलाइन जुआ से जुड़े कारोबार को वित्तपोषित करने में किया।
अधिकारियों के अनुसार, मोहित ने 17 दिसंबर 2024 को सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में जिनेवा स्थित भारतीय स्थायी मिशन में कार्यभार संभाला था। उन्हें यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (UBS) में भुगतान निर्देशों की भौतिक फाइलें जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मिशन के बैंक खाते अमेरिकी डॉलर (USD) और स्विस फ्रैंक (CHF) में संचालित होते हैं, जबकि अनियमितताएं CHF खाते में सामने आई हैं।
भुगतान प्रक्रिया में कैसे हुई गड़बड़ी
दूतावास की ओर से स्विस वेंडरों को उनके इनवॉइस के आधार पर CHF में भुगतान किया जाता था। इन इनवॉइस पर वेंडर के बैंक विवरण के साथ पूर्व-मुद्रित क्यूआर कोड अंकित रहते थे। इन क्यूआर कोड की भौतिक प्रति के साथ भुगतान निर्देश पर्चियां, जिन्हें विशेष अधिकारी और आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) तुषार लकरा द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता था, यूबीएस में जमा कराई जाती थीं।
जांच एजेंसियों को किस बात पर है शक
जांच में सामने आया है कि मोहित को क्यूआर कोड और भुगतान निर्देश पर्चियों को स्वयं यूबीएस तक पहुंचाने का दायित्व सौंपा गया था। इसके अलावा, उन्हें मिशन प्रमुख अमित कुमार के साथ खातों से संबंधित जानकारी देखने की भी अनुमति थी। आशंका है कि मोहित ने कुछ वेंडरों के मूल क्यूआर कोड को हटाकर अपने द्वारा बनाए गए क्यूआर कोड लगाए, जिससे भुगतान वेंडर के खातों में जाने के बजाय यूबीएस में उनके निजी CHF खाते में स्थानांतरित हो गया।
फिलहाल CBI पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितनी राशि की हेराफेरी हुई और इस धोखाधड़ी में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।