नई दिल्ली | महाराष्ट्र के खेल मंत्री और सीनियर एनसीपी नेता माणिकराव कोकाटे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 1995 के धोखाधड़ी मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा पर रोक लगा दी है, जिससे वह फिलहाल विधानसभा सदस्य बने रहेंगे और उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य नहीं ठहराया जा सकेगा।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत कोकाटे को किसी सरकारी पद या ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ पर बने रहने का अधिकार नहीं देती। इसका मतलब है कि वह मंत्री पद या किसी अन्य लाभकारी सरकारी पद पर कार्य नहीं कर पाएंगे।
मामले का विवरण
कोकाटे पर आरोप है कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए सरकारी योजना में झूठा हलफनामा दाखिल करके फ्लैट हासिल किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच – जस्टिस संजय करोल और जस्टिस उज्जल भुइयां – ने कहा कि आय की घोषणा न करना अपने आप में किसी दस्तावेज को फर्जी नहीं बनाता।
कोकाटे के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में दलील दी कि जिस कथित अपराध का आरोप है, वह 1989 का है, जब कोकाटे न तो विधायक थे और न ही किसी संवैधानिक पद पर थे। वह उस समय वकील के तौर पर काम कर रहे थे। वकील ने कहा कि उस समय एक वकील का 30 हजार रुपये कमाना सामान्य बात थी।
दोषसिद्धि पर रोक
मुख्य न्यायाधीश ने मुकुल रोहतगी की दलील पर ध्यान देते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि पर फिलहाल इस हद तक रोक रहेगी कि उसके कारण माणिकराव कोकाटे की विधानसभा सदस्यता प्रभावित न हो।
इस फैसले के बाद माणिकराव कोकाटे फिलहाल विधायक बने रहेंगे, लेकिन मंत्री पद या अन्य लाभकारी पद पर कार्य करने में असमर्थ होंगे।