Mandi, Dharamveer-:हिमाचल प्रदेश में सरकारी उचित मूल्य की दुकानों यानी डिपुओं पर राशन वितरण के लिए लगाई गई मशीनें इन दिनों तकनीकी बदहाली का शिकार हैं। प्रदेश के कई डिपुओं में ये मशीनें बिना सिम कार्ड के ही संचालित की जा रही हैं, जिससे डिपो संचालकों को हर महीने अपनी जेब से इंटरनेट का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि आउटडेटेड हो चुकी इन मशीनों को चलाने के लिए डिपो संचालक अपने निजी मोबाइल फोन के डाटा से वाई-फाई जोड़कर काम करने को मजबूर हैं।
डिपो संचालक खुद उठा रहे इंटरनेट का अतिरिक्त खर्च
डिपो संचालकों का कहना है कि लगभग दस वर्ष पहले जब ये मशीनें राशन वितरण के लिए दी गई थीं, तब इनमें इंटरनेट सुविधा के लिए सिम कार्ड लगाए गए थे। उस समय संबंधित कंपनी द्वारा हर महीने इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाई जाती थी, जिससे मशीनें सुचारू रूप से चलती थीं। लेकिन कुछ समय बाद इन सिम कार्डों ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद विभाग के निर्देश पर सभी सिम कार्ड संबंधित कंपनी को वापस जमा करवा दिए गए। डिपो संचालकों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें दोबारा कभी सिम कार्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए।
डिपो संचालक राजेश कुमार, अनूप सिंह और संजीव ने बताया कि सिम कार्ड न होने के कारण उन्हें मशीनों को चलाने के लिए खुद इंटरनेट की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इसके चलते उन्हें हर महीने करीब 500 से 800 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि पहले से ही सीमित कमीशन पर काम कर रहे डिपो संचालकों के लिए यह अतिरिक्त बोझ आर्थिक रूप से परेशान करने वाला है।डिपो संचालकों ने यह मुद्दा कई बार विभागीय अधिकारियों और सरकार के सामने उठाया, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। संचालकों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि मशीनों के लिए उपलब्ध करवाई गई सिमों और डाटा का आखिर क्या हुआ। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि डाटा और सिम कार्ड की जिम्मेदारी किसकी थी।
राज्य खाद्य निगम का कहना- मार्च तक दे दी जाएंगी नई मशीनें
वहीं, इस मामले पर राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन डॉ. एसपी कत्याल का कहना है कि यह विषय पहले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था, जिस पर अब फैसला आ चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार डिपो संचालकों को नई और आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाने जा रही है। ये नई मशीनें मार्च महीने से पहले-पहले सभी डिपुओं को दे दी जाएंगी। उनके अनुसार वर्तमान में जो मशीनें इस्तेमाल हो रही हैं, वे तकनीकी रूप से पुरानी हो चुकी हैं और आज की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। नई मशीनें मिलने के बाद यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और डिपो संचालकों को निजी खर्च पर इंटरनेट का प्रबंध नहीं करना पड़ेगा।