राहुल चावला, धर्मशाला।डाक्टरों की हड़ताल के चलते लगातार दूसरे दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे मरीजों की परेशानियां बढ़ गईं। जिला कांगड़ा के जोनल अस्पताल धर्मशाला में ओपीडी बंद रहने के कारण चेकअप के लिए पहुंचे मरीजों को या तो लौटना पड़ा या फिर मजबूरी में इमरजेंसी सेवाओं का सहारा लेना पड़ा।
दरअसल, आईजीएमसी शिमला में मरीज के साथ मारपीट के आरोप में बर्खास्त किए गए डाक्टर की बहाली की मांग को लेकर डाक्टर्स एसोसिएशन ने पहले मास कैजुअल लीव और बाद में अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया। इसके असर से प्रदेश सहित कांगड़ा जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। हड़ताल की जानकारी न होने के चलते कई मरीज अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें निराशा हाथ लगी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी सेवाएं चालू हैं और वहां अतिरिक्त डाक्टर तैनात किए गए हैं, लेकिन ओपीडी बंद होने से सामान्य मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि जब नियमित जांच ही नहीं होगी तो अन्य सेवाओं का लाभ सीमित रह जाएगा।
जोनल अस्पताल धर्मशाला के एसएमओ डॉ. सुनील भट्ट ने बताया कि आईजीएमसी शिमला मामले में डाक्टर को टर्मिनेट किए जाने के विरोध में हड़ताल जारी है। प्रमुख मांग बर्खास्त डाक्टर की बहाली है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को वापस नहीं भेजा जा रहा और सभी को इमरजेंसी में अटेंड किया जा रहा है। साथ ही उम्मीद जताई कि जल्द समाधान निकलने पर डाक्टर काम पर लौटेंगे।
सकोह से आई ज्योति ने बताया कि उनके बच्चे को वायरल की समस्या है और जोनल अस्पताल के उपचार से ही लाभ मिलता है, इसलिए वह यहां पहुंची हैं। वहीं नूरपुर की सूर्यांशी भारद्वाज, जो धर्मशाला में पढ़ाई कर रही हैं, ने कहा कि उन्हें डाक्टरों की हड़ताल की जानकारी नहीं थी। सर्दी-खांसी के इलाज के लिए छुट्टी लेकर आई थीं, लेकिन ओपीडी बंद होने से अब इमरजेंसी में दिखाना पड़ेगा या फिर दो दिन बाद दोबारा आना होगा।