चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने महिला सशक्तिकरण को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के दायरे का विस्तार कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश की एक लाख से अधिक नई महिलाएं योजना के अंतर्गत शामिल होंगी और उन्हें प्रतिमाह आर्थिक सहायता का लाभ मिलेगा।
सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और परिवार की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना है। योजना के तहत पहले से लाभान्वित महिलाओं को मिलने वाली सहायता में कोई कटौती नहीं की गई है और उन्हें पहले की तरह 2100 रुपये प्रति माह मिलते रहेंगे।
आय सीमा और पात्रता स्पष्ट
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जिन परिवारों की सालाना आय एक लाख रुपये तक है, उन्हें पहले की तरह योजना का लाभ मिलता रहेगा। इसके अलावा, सरकार ने सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए योजना में तीन नई श्रेणियां जोड़ी हैं, जिनके लिए पारिवारिक आय सीमा 1.80 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यह लाभ अधिकतम तीन बच्चों तक ही मान्य होगा।
तीन नई श्रेणियों का विवरण
पहली श्रेणी:
ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है और जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, यदि वे 10वीं या 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करते हैं, तो उनकी माताओं को 2100 रुपये प्रति माह का लाभ मिलेगा।
दूसरी श्रेणी:
जिन परिवारों के बच्चे निपुण भारत मिशन के तहत कक्षा 1 से 4 तक ग्रेड-लेवल प्रोफिशिएंसी हासिल करते हैं, उनकी माताएं भी इस योजना के तहत सहायता की पात्र होंगी।
तीसरी श्रेणी:
यदि कोई बच्चा पोषण ट्रैकर में कुपोषित या एनीमिया ग्रस्त दर्ज था और मां के प्रयासों से वह स्वस्थ होकर ग्रीन जोन में आ जाता है, तो ऐसी माताओं को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
भविष्य की सुरक्षा के लिए नई वित्तीय व्यवस्था
महिलाओं और उनके परिवारों को दीर्घकालीन वित्तीय संबल देने के उद्देश्य से सरकार ने योजना में एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत 2100 रुपये की मासिक सहायता में से 1100 रुपये सीधे महिला के खाते में जमा होंगे, जबकि 1000 रुपये राज्य सरकार द्वारा रिकरिंग या फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में निवेश किए जाएंगे।
यह जमा राशि ब्याज सहित लाभार्थी महिला को मिलेगी। साथ ही, लाभार्थी की असामयिक मृत्यु की स्थिति में यह राशि नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) को तुरंत प्रदान किए जाने का प्रावधान भी किया गया है।
सरकार का मानना है कि यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास को भी नई दिशा देगी।