Shimla, Sanju-:धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की 19 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान हुई मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा कॉलेज में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी, जिसके चलते वह गहरे अवसाद में चली गई थी। इस मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। शिमला में माकपा (CPI-M) ने प्रदेश सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
CPI(M) नेताओं ने इस पूरे मामले में धर्मशाला पुलिस और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो शायद यह दुखद घटना रोकी जा सकती थी। छात्रा की मौत से पहले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कॉलेज से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है। परिजनों ने कॉलेज की कुछ छात्राओं पर रैगिंग और एक अध्यापक पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान CPI(M) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यह घटना पूरी व्यवस्था की विफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि यह मामला अचानक नहीं बना, बल्कि जुलाई महीने से पीड़िता और उसका परिवार न्याय के लिए विभिन्न स्तरों पर गुहार लगाता रहा। इसके बावजूद न तो कॉलेज प्रशासन ने ठोस कदम उठाए और न ही पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई की।
राकेश सिंघा ने कहा कि अब इस मामले को केवल स्थानीय पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि अब तक की कार्रवाई से सच्चाई सामने नहीं आ पाई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच के लिए स्पष्ट पैरामीटर निर्धारित करने की मांग की।
CPI(M) ने चेतावनी दी है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। पार्टी ने इस मामले में पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।