Mandi, Dharamveer-:हिमाचल प्रदेश में बरसात के मौसम के बाद से जारी लंबे ड्राई स्पैल ने अब खेती-बाड़ी को गहरे संकट में डाल दिया है। जहां एक ओर शुष्क ठंड ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी ओर रबी फसलों पर इसका प्रतिकूल असर साफ नजर आने लगा है। मंडी जिला में हालात विशेष रूप से चिंताजनक हैं, जहां अब तक 5 से 7 प्रतिशत फसलों के नुकसान की पुष्टि हो चुकी है। यदि आने वाले दिनों में बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो नुकसान और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
लंबे समय से चल रहे ड्राई स्पैल से रबी की फसलों पर पड़ने लग गया विपरित असर
बरसात के दौरान प्रदेश में अत्यधिक वर्षा ने भारी तबाही मचाई थी, लेकिन इसके बाद मौसम ने अचानक करवट ली और बादल जैसे रूठ गए। मानसून विदा होने के बाद से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश नहीं हुई है। सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अपेक्षित वर्षा और बर्फबारी के अभाव में खेतों की नमी लगातार घटती जा रही है। इसका सीधा असर गेहूं सहित रबी की अन्य फसलों की बिजाई और बढ़वार पर पड़ रहा है।
मंडी जिले के किसान कन्हैया लाल, खूब राम और प्रताप सिंह बताते हैं कि वे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कुछ किसानों ने जोखिम उठाते हुए गेहूं और अन्य रबी फसलों की बिजाई तो कर दी है, लेकिन पर्याप्त नमी न मिलने के कारण फसलें कमजोर हो रही हैं। वहीं, कई किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने बारिश न होने के चलते अब तक बिजाई ही नहीं की है। उनका कहना है कि बिना नमी के बीज डालना घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई, तो पैदावार पर भारी असर पड़ेगा। कमजोर अंकुरण और सूखी मिट्टी के कारण फसलों में रोग लगने का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए राहत और मुआवजे की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके।
कृषि विभाग के जिला उपनिदेशक डॉ. आर.सी. चौधरी के अनुसार, मंडी जिला में इस वर्ष करीब 73,390 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बिजाई की गई है। हालांकि, अभी भी 10 से 12 प्रतिशत क्षेत्र ऐसा है, जहां किसान गेहूं की बिजाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिले में सिंचित क्षेत्र मात्र 20 से 22 प्रतिशत है, जबकि शेष कृषि भूमि पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है। यही कारण है कि बारिश न होने की स्थिति में नुकसान तेजी से बढ़ता है।डॉ. चौधरी ने यह भी जानकारी दी कि बारिश के अभाव में अब तक 5 से 7 प्रतिशत फसल नुकसान दर्ज किया गया है। यदि यह ड्राई स्पैल जारी रहा, तो आने वाले समय में उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है। उन्होंने बताया कि पीला रतुआ जैसी बीमारियों की आशंका को देखते हुए विभाग ने विशेष टीमें गठित कर दी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत दवाइयों का छिड़काव किया जा सके।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दिसंबर और जनवरी में होने वाली नियमित बारिश और बर्फबारी अब अनिश्चित होती जा रही है। इस जलवायु परिवर्तन का असर न केवल पर्यावरण संतुलन पर पड़ रहा है, बल्कि किसानों और बागवानों की आजीविका भी इससे प्रभावित हो रही है।फिलहाल मंडी सहित पूरे हिमाचल के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से चला आ रहा यह सूखा दौर जल्द समाप्त होगा और बारिश-बर्फबारी के रूप में राहत मिलेगी, ताकि उनकी फसलें बच सकें और खेतों में फिर से हरियाली लौट सके।