Shimla, Sanju-: हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2026 के दौरान राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी जनसंपर्क अभियान ‘सरकार गांव के द्वार’ प्रदेश के सभी जिलों और सभी विधानसभा क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार सीधे ग्रामीण स्तर पर पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेगी और उनका समाधान मौके पर ही सुनिश्चित करेगी। यह जानकारी प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने शिमला सचिवालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी।
राजेश धर्माणी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार 2 जनवरी को आयोजित राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में इस कार्यक्रम के शेड्यूल को दोबारा जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासन को जनता के दरवाजे तक ले जाना है, ताकि आम नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए जिलावार मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी पंचायत स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएंगे।मंत्री ने बताया कि अक्टूबर 2023 में शुरू किए गए विशेष राजस्व अभियान के तहत दिसंबर 2025 तक प्रदेशभर में 5 लाख 10 हजार से अधिक राजस्व मामलों का निपटारा किया गया है। इनमें लगभग 4.24 लाख म्यूटेशन, 2.50 लाख बंटवारे (पार्टिशन), 47 हजार सीमांकन और 12,896 राजस्व प्रविष्टि सुधार के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भूमि विवादों के कारण वर्षों तक अदालतों में मामले लंबित रहते हैं और कई बार इससे सामाजिक व आपराधिक तनाव भी उत्पन्न हो जाता है। सरकार इन समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध तरीके से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजेश धर्माणी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अब प्रदेश में हर महीने दो दिन राजस्व लोक अदालतें लगाई जाएंगी।इसके अतिरिक्त प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को म्यूटेशन, पार्टिशन और राजस्व प्रविष्टियों में सुधार के लिए विशेष अदालतों का आयोजन किया जाएगा। हर सप्ताह शनिवार को मामलों की समीक्षा होगी, जिसकी रिपोर्ट एसडीएम डीसी को देंगे। इसके बाद एसीएस राजस्व द्वारा राजस्व मंत्री को जानकारी दी जाएगी और हर महीने के अंतिम सोमवार को मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक सभी लंबित राजस्व प्रविष्टियां पूरी तरह दुरुस्त कर ली जाएं।
आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों के चलते 1 अप्रैल 2023 से 30 सितंबर 2025 के बीच राज्य को 36,683 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछली सरकार की समान अवधि की तुलना में लगभग 3,800 करोड़ रुपये अधिक है। टेंडर प्रक्रिया में सुधार से 5,408 करोड़ रुपये की बचत हुई, जबकि वर्ष 2023-24 में स्टेट एक्साइज ड्यूटी और वैट से 867 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नई टाउनशिप को लेकर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।