भिवानी | हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने नकल और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। प्रश्न पत्रों पर क्यूआर कोड और हिडन फीचर्स की सफल शुरुआत के बाद अब बोर्ड 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं पर भी यह तकनीक लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत प्रदेशभर के करीब पांच लाख परीक्षार्थियों की लगभग 30 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर क्यूआर कोड और विशेष सुरक्षा फीचर्स होंगे।
बोर्ड प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से उत्तर पुस्तिकाओं की ट्रैकिंग आसान होगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या छेड़छाड़ को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। पहले प्रश्न पत्रों पर क्यूआर कोड लागू होने से यह पता चल जाता था कि पेपर कहां से लीक हुआ है, जिससे दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव हुई। इसी तर्ज पर अब उत्तर पुस्तिकाओं को भी तकनीकी निगरानी में लाने की योजना बनाई गई है।
हालांकि इस फैसले से बोर्ड पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ने वाला है। सामान्य परिस्थितियों में उत्तर पुस्तिकाओं के मुद्रण पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आता है, लेकिन क्यूआर कोड और हिडन फीचर्स जुड़ने के बाद यह खर्च साढ़े चार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी बोर्ड को करीब तीन करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।
इसी अतिरिक्त खर्च और संभावित गोपनीयता जोखिम को लेकर कर्मचारी संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों में उत्तर पुस्तिकाओं की लीकेज या किसी बड़ी गड़बड़ी की कोई शिकायत सामने नहीं आई है, ऐसे में इस व्यवस्था की जरूरत पर सवाल उठते हैं। कर्मचारी संगठनों का यह भी आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मुद्रण से जुड़ी प्रक्रिया में तय नियमों का पालन नहीं किया गया और इससे गोपनीयता भंग होने की आशंका बढ़ सकती है।
वहीं बोर्ड प्रशासन का दावा है कि आने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू की जाएगी और इससे परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनेगी। बोर्ड का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से नकल पर प्रभावी नियंत्रण होगा और परीक्षाओं की विश्वसनीयता को और मजबूत किया जा सकेगा।