चंडीगढ़। हरियाणा में नए जिले, मंडल, उपमंडल और तहसील-उपतहसील के गठन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना आयुक्त के बाद अब चुनाव आयोग ने भी प्रदेश में प्रशासनिक सीमाओं में किसी भी तरह के बदलाव पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगी, जो वर्ष 2029 तक प्रस्तावित है। इसके बाद ही प्रशासनिक ढांचे में किसी प्रकार का संशोधन संभव होगा।
इस फैसले के चलते गोहाना, डबवाली और मानेसर सहित अन्य क्षेत्रों की जिला बनने की दावेदारी फिलहाल टल गई है। हालांकि राज्य सरकार चाहे तो मंत्रियों की कैबिनेट सब कमेटी का कार्यकाल बढ़ा सकती है, लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति आवश्यक होगी और सभी राजनीतिक दलों के एक-एक प्रतिनिधि को कमेटी में शामिल करना अनिवार्य रहेगा।
उल्लेखनीय है कि विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब कमेटी को प्रदेश में 11 नए जिले बनाने के प्रस्ताव मिले थे। इनमें से हांसी, सफीदों, असंध, डबवाली, मानेसर और गोहाना को शॉर्टलिस्ट किया गया था। जनसंख्या और अन्य मानकों पर खरा उतरने के बाद हांसी को हरियाणा का 23वां जिला घोषित किया जा चुका है, जबकि बाकी दावेदार कसौटी के करीब रह गए।
प्रदेश में जनगणना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जो पूरी तरह डिजिटल होंगी। पहला चरण एक मई से शुरू होगा, जिसमें मकानों का सूचीकरण और आवास जनगणना की जाएगी। इसी कारण सभी प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज कर दिया गया है।
वर्तमान में हरियाणा में छह मंडल, 23 जिले, 80 उपमंडल, 94 तहसीलें, 49 उपतहसीलें, 143 खंड, 154 कस्बे और 6,841 गांव हैं। भविष्य में परिसीमन के दौरान गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े जिलों के विभाजन की भी संभावना जताई जा रही है।
कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण लाल पंवार ने संकेत दिए हैं कि यदि चुनाव आयोग की अनुमति मिलती है तो परिसीमन प्रक्रिया के दौरान भी सीमित बदलाव किए जा सकते हैं। हालांकि फिलहाल नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन को लेकर स्थिति यथावत बनी रहेगी।