Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान और उससे जुड़े IPS विवाद पर अपनी स्पष्ट और संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह उम्र में छोटे हैं और इसलिए किसी भी तरह के अनावश्यक विवाद में पड़ना नहीं चाहते, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह जनता के हितों या अपने सिद्धांतों से समझौता करेंगे।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों का मूल उद्देश्य केवल और केवल जनता की सेवा होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि वह इस पद पर इसलिए हैं क्योंकि प्रदेश की जनता ने उन्हें चुना है और उनकी पहली प्राथमिकता “सर्विस ऑफ द पीपल” है। अगर कहीं प्रशासनिक स्तर पर कोई कमी दिखाई देती है या जनता के हित प्रभावित होते हैं, तो उसे उठाना उनका कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी है।
IPS अधिकारियों से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह पहले ही इस मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ कर चुके हैं और सभी संस्थाओं तथा अधिकारियों का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है, जहां संविधान के तहत हर संस्था, पद और अधिकारी की अपनी-अपनी जिम्मेदारी तय है। ऐसे में सभी को अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर काम करना चाहिए।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी सार्वजनिक सेवक खुद को शासक समझने की भूल न करे। अधिकारी जनता की सेवा के लिए होते हैं और अगर कहीं ऐसा लगता है कि जनता के हितों की अनदेखी हो रही है, तो जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि वे सवाल उठाएं। इस जिम्मेदारी से वह कभी पीछे नहीं हटेंगे।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान के बाद IPS अधिकारियों के रुख और मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट मांगे जाने के मामले पर भी विक्रमादित्य सिंह ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके मन में IPS एसोसिएशन और प्रदेश के सभी अधिकारियों के लिए पूरा सम्मान है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश के लोग इतने कमजोर नहीं हैं कि उन्हें किसी अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता पड़े।
सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने दो टूक कहा कि उनके लिए प्रदेश की जनता का प्यार, समर्थन और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। उन्हें किसी तरह की अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत नहीं है। यदि कोई सुरक्षा वापस लेनी है, तो ली जा सकती है। उन्होंने इसे किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक मुद्दा बनाने से भी इनकार किया।
सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पर चल रही समर्थन और विरोध की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद स्वाभाविक हैं। हर व्यक्ति की अपनी सोच और दृष्टिकोण होता है, लेकिन वह अपने सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगे। इन्हीं मूल्यों से किसी व्यक्ति की असली पहचान बनती है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जहां भी रहेंगे—चाहे शिमला में हों या दिल्ली में—हिमाचल प्रदेश के लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे। प्रदेश के करीब 75 लाख लोगों के प्रति उनकी जवाबदेही है। अगर उन्हें कहीं भी यह महसूस होगा कि हिमाचल के हितों से समझौता किया जा रहा है, तो वह लगातार अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
गौरतलब है कि मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी। इसी क्रम में IPS अधिकारियों द्वारा विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात से इनकार और मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट मांगे जाने का मामला भी चर्चा में रहा। अब विक्रमादित्य सिंह के इस बयान के बाद साफ हो गया है कि वह विवाद से दूर रहकर जनहित और संवैधानिक मूल्यों के साथ खड़े रहने की नीति पर आगे बढ़ना चाहते हैं।