गुरुग्राम। तिघरा गांव में किसानों और बिल्डर के बीच लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद ने अब पुलिस हस्तक्षेप को लेकर नया मोड़ ले लिया है। पुलिस पर बिल्डर से मिलीभगत कर किसानों पर दबाव बनाने के आरोप लगाते हुए रविवार को किसानों ने महापंचायत का आयोजन किया। इस महापंचायत में गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद और राजस्थान की विभिन्न खाप पंचायतों के प्रधान व पदाधिकारी भी शामिल हुए।
महापंचायत में किसानों ने आरोप लगाया कि बिल्डर जबरन उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और पुलिस उसके दबाव में आकर किसानों को परेशान कर रही है। पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि बिल्डर के खिलाफ कानूनी लड़ाई को और मजबूती से लड़ा जाएगा। साथ ही पंचायत द्वारा गठित एक कमेटी ने सेक्टर-56 थाना प्रभारी से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की।
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने कमेटी को आश्वासन दिया कि पुलिस किसी भी किसान को बेवजह परेशान नहीं करेगी और मामले में जो भी निर्णय जिला प्रशासन और अदालत के माध्यम से होगा, वही मान्य होगा। इस आश्वासन के बाद पंचायत ने धरना अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि मौके पर कुछ लोग मौजूद रहेंगे, जो प्रशासन और बिल्डर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे।
महापंचायत के अध्यक्ष के रूप में झाड़सा 360 के प्रधान श्याम बाबा को चुना गया। तिघरा गांव के प्रधान अंतराम तंवर सहित अन्य वक्ताओं ने बताया कि पिछले 21 दिनों से किसान धरने पर बैठे थे। इससे पहले जब किसान उपायुक्त अजय कुमार से मिले थे, तो उन्होंने मामले में स्टेटस-को लगाते हुए जांच एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला को सौंपी थी। दोनों पक्षों से बातचीत कर जांच प्रक्रिया जारी है।
किसानों का कहना है कि स्टेटस-को लागू होने के बावजूद बिल्डर ने पुलिस में शिकायत कर दबाव बनवाने की कोशिश की, जिसके चलते महापंचायत बुलानी पड़ी। पंचायत में मौजूद अधिवक्ताओं ने भी किसानों के पक्ष को मजबूत बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।
अंत में पंचायत ने निर्णय लिया कि बिल्डर की कथित मनमानी के खिलाफ मंत्रियों और मुख्यमंत्री से मुलाकात की जाएगी। इसके लिए 51 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई है, जो आगे की रणनीति तय करेगी।