शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के यूपी और बिहार के अधिकारियों पर दिए गए विवादित बयान ने हलचल मचा दी है। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह को पहले अपना विभाग देखना चाहिए और अपनी कार्यप्रणाली को तेज करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अन्य मंत्रियों को भी सलाह दी कि इस प्रकार की बयानबाजी से बचना चाहिए और हिमाचल प्रदेश के विकास और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में एक चैनल से बातचीत में कहा कि देश और प्रदेश के हित में काम करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। देश के किसी भी अधिकारी का काम प्रदेश में हमारी व्यवस्था के तहत ही चलता है और बाहरी अफसरों के बयान या गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी बातें केवल अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए कही जाती हैं और इस प्रकार की बयानबाजी से बचना ही सही रास्ता है।
इस विवाद पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि नकारात्मक सोच वाले अधिकारी केवल बाहरी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी ऐसी सोच रखते हैं। उन्होंने विक्रमादित्य सिंह को काबिल मंत्री बताया और इसे परिवारिक मामला करार देते हुए कहा कि इसे कैबिनेट में लाने की आवश्यकता नहीं है।
मामला तब शुरू हुआ जब सोमवार को विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में उप्र-बिहार के अधिकारियों पर टिप्पणी की थी कि उन्हें हिमाचल प्रदेश से ज्यादा सरोकार नहीं है। मंगलवार को उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में इसे दोहराया। इस पर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की एसोसिएशन ने नाराजगी जताई और प्रस्ताव पारित किया कि विक्रमादित्य सिंह के साथ उनकी ड्यूटी न लगाई जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के विकास में सभी अधिकारियों का योगदान महत्वपूर्ण है, चाहे वह आईएएस, आईपीएस, आईएफएस हों या प्रदेश से जुड़े अधिकारी। उन्होंने कहा कि लोक सेवक स्वयं को शासक समझने की भूल न करें और सभी को मिलकर हिमाचल को आगे बढ़ाने में जुटना चाहिए।