हरियाणा में इस रबी सीजन मौसम किसानों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। प्रदेश में गेहूं, जौ और चने की फसलों से बंपर पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। मानसून के दौरान अधिक बारिश होने से वातावरण में बनी नमी, ठंड और कोहरे ने फसलों की बढ़वार को फायदा पहुंचाया है। हालांकि सरसों की फसल पर मौसम का हल्का प्रतिकूल असर देखने को मिल सकता है।
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शनिवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुग्राम में अधिकतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि नारनौल में यह 15.6 डिग्री रहा। न्यूनतम तापमान सिरसा में 7.8 डिग्री और नारनौल में 3.0 डिग्री दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार 18 जनवरी तक प्रदेश में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। इस दौरान रात के तापमान में बढ़ोतरी और दिन के तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिलेगी। 19 जनवरी से सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण 22 जनवरी तक उत्तरी जिलों में कहीं-कहीं बूंदाबांदी की संभावना है। वहीं 22 से 25 जनवरी के बीच हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हो सकती है। 26 से 28 जनवरी तथा 29 जनवरी से 1 फरवरी तक भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि ठंड और कोहरे के कारण गेहूं की फसल में फुटाव और बढ़वार अच्छी हो रही है। हल्की बारिश गेहूं, जौ और चने के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। हालांकि नमी बढ़ने से सरसों में फफूंदी रोग की आशंका बनी हुई है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों के लिए 10 से 20 डिग्री तापमान आदर्श होता है। फिलहाल तापमान थोड़ा कम है, लेकिन बड़े नुकसान की संभावना नहीं है। ठंड बने रहने से एफिड जैसे कीटों का प्रकोप भी कम रहेगा। वहीं गेहूं के लिए 8 से 12 डिग्री तापमान उपयुक्त माना जाता है, जिससे दाने मजबूत और वजनदार बनते हैं। वर्तमान मौसम को देखते हुए प्रदेश में इस बार रबी फसलों की रिकॉर्ड पैदावार की पूरी उम्मीद है।