Shimla, 19 January-:जिला प्रशासन शिमला द्वारा नशा तस्करी सहित गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि दर बढ़ाने के उद्देश्य से एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी/एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन होटल होलीडे होम में किया गया। जिला स्तर पर पहली बार आयोजित इस समावेशी कार्यशाला में चिट्टा तस्करों को शीघ्र सजा दिलाने तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध करवाने की रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।
कार्यशाला में जिले के सभी एसडीएम, डीएसपी, एसएचओ, जिला न्यायवादी, अभियोजन अधिकारी, सहायक न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। प्रदेश सरकार के हिमाचल को चिट्टा मुक्त बनाने के संकल्प के तहत विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल मामले दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि यदि मामलों में दोषसिद्धि नहीं हो पाती, तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठने लगता है। जांच की नींव मजबूत होगी तभी न्यायालय में मामले टिक पाएंगे। उन्होंने सभी विभागों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने जांच अधिकारियों को निष्पक्ष, तथ्यपरक और पूर्वाग्रह से मुक्त जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल एफआईआर के आरोपों को साबित करना नहीं, बल्कि सत्य तक पहुंचना होना चाहिए, ताकि अदालत में सही और मजबूत चालान पेश किया जा सके।जिला न्यायवादी सुधीर शर्मा ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि पिछले पांच वर्षों में एनडीपीएस मामलों में मात्र 26 प्रतिशत और पॉक्सो मामलों में 35 प्रतिशत दोषसिद्धि दर रही है, जो चिंता का विषय है। कार्यशाला में पॉक्सो अधिनियम, डीएनए प्रोफाइलिंग, एमएलसी व पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर विशेषज्ञ व्याख्यान भी आयोजित किए गए।कार्यशाला का उद्देश्य सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर प्रभावी रणनीति बनाना रहा, ताकि नशा तस्करों और अन्य अपराधियों को सख्त सजा दिलाकर समाज में कानून का भय और न्याय का भरोसा कायम किया जा सके।