जींद। हरियाणा के फतेहाबाद के बाद अब जींद जिले से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने 10 बेटियों के बाद बेटे को जन्म दिया है। उचाना खुर्द गांव निवासी रितु ने सोमवार को उचाना के नागरिक अस्पताल में सामान्य प्रसव के जरिए बेटे को जन्म दिया। बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है और परिजनों ने नवजात का नाम दिलखुश रखा है।
परिवार के अनुसार, रितु की शादी करीब 24 वर्ष पहले सुरेंद्र से हुई थी, जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। बेटे की चाह में रितु ने कुल 11 बच्चों को जन्म दिया। सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें नागरिक अस्पताल लाया गया, जहां स्टाफ नर्स सुमन लता ने सुरक्षित तरीके से नॉर्मल डिलीवरी कराई। जैसे ही बेटे के जन्म की सूचना मिली, पति सुरेंद्र और अन्य परिजन भावुक हो उठे और अस्पताल परिसर में खुशियां मनाई गईं।
सुरेंद्र ने बताया कि उनकी 10 बेटियां थीं, जिनमें से सबसे छोटी बेटी का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार की नौ बेटियां स्वस्थ हैं। बेटे के जन्म को परिवार ने ईश्वर का आशीर्वाद बताया है।
गौरतलब है कि करीब 15 दिन पहले फतेहाबाद जिले से भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां ढाणी भोजराज निवासी संजय की पत्नी सुनीता ने 10 बेटियों के बाद बेटे को जन्म दिया था। उस बच्चे का नाम भी दिलखुश रखा गया था। हीमोग्लोबिन की कमी के चलते सुनीता को खून चढ़ाकर प्रसव कराया गया था। यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहा था।
इस तरह के मामलों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते हैं। जींद नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने बताया कि दो या तीन से अधिक बार प्रसव कराने से महिला की बच्चेदानी कमजोर हो जाती है, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने महिलाओं से अनावश्यक जोखिम न लेने की अपील की।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–2021) के अनुसार, देश में करीब 80 प्रतिशत दंपती कम से कम एक बेटा चाहते हैं। इसी सोच के चलते कई परिवार बेटे की चाह में अधिक संतान पैदा कर लेते हैं। वहीं, जींद जिले में वर्ष 2025 में लिंगानुपात घटकर 918 रह गया है, जबकि पूरे हरियाणा में इस अवधि में बेटियों की संख्या में सुधार दर्ज किया गया है।