चंडीगढ़ । किसान-मजदूर मोर्चा (केएमएम) भारत के आह्वान पर गुरुवार को पंजाब भर में बिजली निजीकरण के खिलाफ आंदोलन के दूसरे चरण को और तेज कर दिया गया। इस दौरान हजारों बिजली उपभोक्ताओं ने अपने घरों में लगे प्रीपेड मीटर निकालकर बिजली विभाग के दफ्तरों में जमा कराए। आंदोलन की अगुवाई किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के स्टेट प्रेसिडेंट सुखविंदर सिंह सबरा और जनरल सेक्रेटरी राणा रणबीर सिंह ने की।
नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली के निजीकरण और प्रीपेड मीटर व्यवस्था को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने दो टूक कहा कि वह गांव-गांव में डटे रहकर आम लोगों के हितों की रक्षा करेगा और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल जैसे जनविरोधी फैसलों को लागू नहीं होने देगा।
केएमएम नेताओं ने बताया कि 10 दिसंबर 2025 को शुरू हुए आंदोलन के पहले चरण की सफलता के बाद अब दूसरे चरण में भी बड़ी संख्या में आम उपभोक्ता शामिल हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार 80 करोड़ लोगों को मुफ्त या सस्ता राशन देने की बात कर रही है, तो बिजली के लिए अग्रिम भुगतान और महंगे दरों की शर्त आम जनता की आर्थिक स्थिति पर सीधा हमला है। नेताओं ने केंद्र और पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि प्रीपेड मीटरों के जरिए निजी कंपनियों के लिए रास्ता साफ किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रीपेड मीटर हटाकर पारंपरिक मैकेनिकल मीटर लगाए जाएं।
संगठन ने एलान किया कि यदि आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल पेश किया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसके साथ ही, पंजाब सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने के आरोप लगाते हुए 24 जनवरी को बठिंडा डीसी कार्यालय के सामने पत्रकार समुदाय द्वारा किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में भी संगठन शामिल होगा।
केएमएम ने चेतावनी दी कि बिजली संशोधन बिल 2025 और अन्य मांगों को लेकर पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के आवासों का घेराव किया जाएगा, ताकि सरकार को विधानसभा में जनविरोधी फैसलों के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर किया जा सके।