सोनीपत। प्रदेश में रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के उद्देश्य से लागू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री योजना के बावजूद पहला बड़ा जमीन घोटाला सामने आ गया है। सोनीपत जिले की गन्नौर तहसील में करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की साढ़े चार एकड़ जमीन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मात्र 6.16 करोड़ रुपये में बेच दी गई, जबकि दिल्ली निवासी असली मालिक को इसकी भनक तक नहीं लगी।
मामला तब उजागर हुआ जब जमीन की देखरेख करने वाले व्यक्ति को 10 जनवरी को फर्जी रजिस्ट्री की सूचना मिली। जांच में सामने आया कि नसीरपुर बांगर निवासी प्रमोद कुमार ने दिल्ली की फर्म सपाज एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड का जाली अथॉरिटी लेटर तैयार कर खुद को जमीन का अधिकृत मालिक बताया और जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह के नाम जमीन रजिस्टर्ड करा दी। इस रजिस्ट्री में विक्रेता, खरीदार, गवाह, नंबरदार और डीड राइटर सभी ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि रजिस्ट्री करने वाले नायब तहसीलदार ने दस्तावेजों में मौजूद कई स्पष्ट खामियों को नजरअंदाज करते हुए रजिस्ट्री को मंजूरी दे दी। बाद में सामने आया कि खरीदार के आधार और पैन कार्ड में जन्मतिथि अलग-अलग है, गवाहों के मोबाइल नंबर लगभग समान हैं और नंबरदार के रिकॉर्ड में भी गंभीर विसंगतियां हैं।
असली मालिक बिकास पाड़िया ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही विवादित रजिस्ट्री रद्द की गई है। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के चलते मामला दबाने की कोशिश की जा रही है। राजस्व विभाग ने भी न तो जांच कमेटी बनाई और न ही जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली की निगरानी में बड़ी चूक को उजागर करता है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच का आश्वासन तो दिया है, लेकिन कार्रवाई के अभाव में यह घोटाला पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।