मालेरकोटला | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मालेरकोटला जिला अस्पताल में आई.सी.यू. और अन्य जरूरी सुविधाओं की अनुपस्थिति पर गंभीर नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इसे “हैरान करने वाला और चौंकाने वाला” करार दिया और पंजाब सरकार से राज्य के सभी जिला अस्पतालों में आई.सी.यू., सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई. मशीनों की स्थिति का विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि मालेरकोटला जिला अस्पताल, जो आसपास के कई क्षेत्रों के लिए रेफरल अस्पताल के रूप में कार्य करता है, में अब तक आई.सी.यू. सुविधा नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे केवल मालेरकोटला तक सीमित मुद्दा नहीं मानते हुए पंजाब के सभी जिला अस्पतालों में मौजूदा सुविधाओं की न्यायिक समीक्षा करने की बात कही।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा पहले दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे संतोषजनक नहीं हैं। बेंच ने कहा कि पंजाब के 23 जिलों में केवल 6 जिलों में ही एम.आर.आई. मशीनें उपलब्ध हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
साथ ही, कोर्ट ने राज्य द्वारा CT स्कैन और MRI जैसी सुविधाओं को निजी लैब में आउटसोर्स करने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने जोर देकर कहा कि नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और अब जिला एवं सब-डिवीज़न स्तर के अस्पतालों में ये आधुनिक सुविधाएं होना अनिवार्य हैं।
यह मामला भीष्म किंगर द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स के उल्लंघन और रेफरल अस्पताल में ICU जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया गया है।