वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए इसे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए अहम कदम बताया। वाशिंगटन डीसी में हुई बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
यह व्यापार समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ है। बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका बुधवार को पहली ‘महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय बैठक’ की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें जयशंकर भी भाग लेने के लिए चार दिवसीय अमेरिका दौरे पर पहुंचे हैं।
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ बातचीत बेहद सार्थक रही। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। जयशंकर के मुताबिक, व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण में सहयोग को औपचारिक रूप देने पर जोर दिया। इसे भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा दोनों नेताओं ने क्वाड (QUAD) मंच के जरिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि समृद्ध और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र भारत और अमेरिका के साझा हितों के लिए बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।