इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के बढ़ते हमलों ने न केवल पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि चीन के अरबों डॉलर के निवेश को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा हालात बिगड़ने के बाद चीन ने ग्वादर में अपने कई महत्वपूर्ण ग्राउंड ऑपरेशंस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
बताया जा रहा है कि BLA के लड़ाकों ने बलूचिस्तान में रणनीतिक बढ़त बनाते हुए पाकिस्तानी सैन्य चौकियों और शिविरों को निशाना बनाया है। विद्रोही समूहों ने दावा किया है कि उन्होंने 10 से अधिक जिलों में सरकारी नियंत्रण को कमजोर कर दिया है और कई क्षेत्रों में उनकी पकड़ मजबूत हो गई है।
ग्वादर में CPEC परियोजनाओं पर असर
ग्वादर को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का सबसे अहम केंद्र माना जाता है। लेकिन लगातार हो रहे हमलों और आत्मघाती वारदातों के कारण चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसी वजह से चीन ने ग्वादर में जमीनी स्तर पर चल रही गतिविधियों को रोकने का फैसला लिया है।
चीन के पीछे हटने की बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार चीन को अब यह महसूस होने लगा है कि पाकिस्तान उसकी परियोजनाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है। BLA की मजीद ब्रिगेड द्वारा किए गए हमलों ने चीनी स्टाफ में डर बढ़ा दिया है। वहीं, CPEC परियोजना जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने का बड़ा आधार मानी जा रही थी, अब रुकती नजर आ रही है।
बलूच जनता में नाराजगी क्यों बढ़ी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चीन और पाकिस्तान ने मिलकर बलूचिस्तान के संसाधनों का फायदा उठाया, लेकिन आम जनता को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। ग्वादर के मछुआरों पर समुद्र में जाने की पाबंदियां लगने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। वहीं, कई इलाकों में बिजली-पानी जैसी सुविधाएं चीनी परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर दी गईं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा।
कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर संकट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, CPEC के तहत बनने वाले सड़क-रेल नेटवर्क और प्रस्तावित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) जैसी परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। सुरक्षा कारणों से काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है और चीनी अधिकारी अब लंबे समय तक वहां ठहरने से बच रहे हैं।
पाकिस्तान के लिए बढ़ता संकट
विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो पाकिस्तान के लिए यह संकट सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक भी साबित हो सकता है। चीन का निवेश रुकने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और डिफॉल्ट का खतरा फिर से गहराता नजर आ रहा है। वहीं, पाकिस्तानी सेना के लिए बलूचिस्तान में नियंत्रण बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।