चंडीगढ़ I कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत वीरवार को लघु सचिवालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। जिला अध्यक्ष नेत्रपाल अधाना के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनरेगा में किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उपायुक्त के नाम से सीईओ को ज्ञापन सौंपा और इन बदलावों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई। विरोध प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा खेमे से जुड़े नेताओं और उनके करीबी कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में हुड्डा गुट के प्रमुख नेता शामिल नहीं हुए, जिससे संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री करन दलाल भूपेंद्र हुड्डा के समधी हैं, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और हथीन से विधायक इसराईल को भी हुड्डा खेमे का करीबी माना जाता है। इसके बावजूद इन नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
कांग्रेस में गुटबाजी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जब पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की सद्भाव यात्रा पलवल पहुंची थी, तब कई नेताओं ने इसे व्यक्तिगत यात्रा बताकर दूरी बना ली थी, जिससे वह कार्यक्रम प्रभावहीन साबित हुआ था। बाद में हुड्डा गुट से जुड़े नेताओं करन दलाल और उदयभान ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा था कि जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठनात्मक गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं।
हालिया प्रदर्शन ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है, जो आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है।