पलवल। जिले में वायु प्रदूषण बढ़ाने वाली मेटल, टेक्सटाइल और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी करीब 38 औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिह्नित किया था। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन फैक्ट्रियों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए थे, ताकि चिमनियों से निकलने वाले धुएं की ऑनलाइन निगरानी की जा सके।
इसके लिए 31 दिसंबर 2025 तक की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद जिले की चयनित फैक्ट्रियों में यह सिस्टम अब तक स्थापित नहीं हो पाया है। इस मामले को गंभीर मानते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर फरीदाबाद सीमा से सटा पृथला औद्योगिक क्षेत्र प्रदूषण की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। बधौला, पृथला, ततारपुर, दूधौला, जटौला, घतीर, छपरौला, सिकंदरपुर, नंगला भीकू और देवली सहित कई गांव इस औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा हैं। यहां 200 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 20 हजार श्रमिक कार्यरत हैं। उद्योगों से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का जीएसटी भी मिलता है।
बताया गया है कि साल के अंतिम तीन महीनों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है। फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला काला और जहरीला धुआं आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है। स्थानीय लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाला CEMS सिस्टम चिमनी से निकलने वाले धुएं में मौजूद प्रदूषक तत्वों को मापकर रिकॉर्ड करता है और इसकी रिपोर्ट सीधे CPCB के सर्वर तक भेजता है। इससे प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल जाता है और कार्रवाई संभव होती है।
उद्योगपतियों का कहना है कि उन्होंने सिस्टम खरीदने के लिए ऑर्डर दे दिए हैं, लेकिन सप्लाई में देरी के कारण अभी तक इंस्टॉलेशन नहीं हो पाया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सिद्धार्थ भार्गव ने बताया कि कई फैक्ट्रियों को उपकरण प्राप्त हो चुके हैं और इसी महीने से सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।