शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और फर्जीवाड़े के जरिए ‘शॉर्टकट’ अपनाने वालों पर सख्ती तय हो गई है। राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कानून लागू कर दिया है। 9 फरवरी से प्रदेश में ‘हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2025’ पूरी तरह प्रभावी हो गया है।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इसे प्रदेश की चयन प्रक्रिया में ईमानदारी और विश्वास बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह कानून नकल माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ एक मजबूत कानूनी हथियार साबित होगा।
दरअसल, बीते कुछ वर्षों में प्रदेश की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित धोखाधड़ी के मामले सामने आए थे, जिससे मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया था। ऐसे मामलों ने सरकारी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इसी कारण सरकार ने सख्त प्रावधानों वाला यह कानून लागू किया है।
नए अधिनियम के तहत यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे दो साल तक की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। खास बात यह है कि यह कानून केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति भी यदि पेपर लीक, गोपनीयता भंग करने या किसी भी प्रकार की अनियमितता में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल युग में ब्लूटूथ डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और तकनीकी तरीकों से होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। परीक्षा प्रणाली, कंप्यूटर नेटवर्क या डेटा से छेड़छाड़ को अब गंभीर अपराध माना जाएगा और इसके लिए कठोर दंड तय किया गया है।
इसके अलावा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेंगी।