शिमला। राज्य सचिवालय में उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब मंडी के उपायुक्त (डीसी) अपूर्व देवगन आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविन्द्र गोमा से मुलाकात के लिए शिमला पहुंचे। हालांकि, सचिवालय पहुंचने के बावजूद डीसी की मंत्री गोमा से भेंट नहीं हो सकी।
गौरतलब है कि मंत्री यादविन्द्र गोमा ने मंडी में कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाते हुए डीसी अपूर्व देवगन के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और सरकार के बीच खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मंत्री गोमा ने कहा कि उन्होंने अपनी ओर से विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेज दिया है और अब इस मामले में निर्णय विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा ही लिया जाएगा। वहीं, डीसी का सचिवालय पहुंचना इस मामले को सुलझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
26 जनवरी के कार्यक्रम से जुड़ा है विवाद
यह विवाद 26 जनवरी को मंडी में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ा है। मंत्री गोमा बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पहुंचे थे। मंत्री का आरोप है कि उस दौरान डीसी मंडी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नहीं थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर मौके पर आए थे।
मंत्री का कहना है कि जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी के मौके पर न होने के कारण लोगों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पाया और यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इसके बाद ही उन्होंने डीसी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भेजा।
कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने प्रस्ताव को बताया सही
इस मामले पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उपायुक्त मंडी के खिलाफ मंत्री गोमा द्वारा लाए गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को उचित बताया।
विनय कुमार ने कहा कि मंत्री का प्रस्ताव सही है और विधायक प्राथमिकता बैठक में विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार और संगठन के बीच किसी तरह की नाराजगी नहीं है। मामले के तूल पकड़ने के बाद डीसी मंडी का शिमला पहुंचना अब प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।