शिमला | हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिलेगा तो वह जेपी नड्डा के नेतृत्व में भी नई दिल्ली जाने को तैयार हैं। सुक्खू ने रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाजपा के विधायकों को भी आमंत्रित किया था, लेकिन भाजपा नेताओं ने पहले से तय कार्यक्रम और व्यस्तताओं का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) को बंद करने की लड़ाई जनता की अदालत में लड़ी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होने पर भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल आज है, कल नहीं, और कोई भी पद स्थायी नहीं है।
सुक्खू ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री ने सर्वदलीय बैठक के लिए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से संपर्क किया था। जयराम ने बैठक को किसी अन्य दिन रखने का प्रस्ताव रखा। बैठक में भाजपा विधायकों को यह समझाया जाना था कि आरडीजी बंद होने से आगामी पांच से दस वर्षों में राज्य पर क्या असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वित्तीय अनुशासन के तहत हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दिशा दी गई है और कई निर्णयों का लाभ मिलना शुरू हो गया है। आगामी 2026-2031 के दौरान लगभग 50,000 करोड़ रुपये के लाभ की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक सचिवालय में आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में बजट पेश करने की तिथि, राज्यपाल के अभिभाषण का ड्राफ्ट, और राजस्व घाटा अनुदान पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद सुक्खू कांग्रेस विधायकों के समक्ष आरडीजी से होने वाले संभावित नुकसान पर प्रस्तुति देंगे।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि वे सभी दलों के साथ मिलकर राज्यहित में काम करने के लिए तैयार हैं और हिमाचल के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।