राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर करेंगी स्टेट लेवल कंसल्टेशन की अध्यक्षता
शिमला, 11 फरवरी -:राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा 12 फरवरी को शिमला में उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा विषय पर राज्य स्तरीय कंसल्टेशन का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक उपायुक्त कार्यालय शिमला स्थित बचत भवन में आयोजित होगा।
आयोग के प्रवक्ता ने आज यहां जानकारी देते हुए बताया कि बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर करेंगी। कंसल्टेशन में राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार एवं डीन, विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, वरिष्ठ प्राध्यापक, आंतरिक शिकायत समितियों (इंटरनल कमेटी) के सदस्य, विधि विशेषज्ञ, छात्र प्रतिनिधि, राष्ट्रीय महिला आयोग के अधिकारी तथा राज्य प्रशासन के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान युवा महिलाओं के बौद्धिक, सामाजिक और व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यद्यपि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, फिर भी शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा, सम्मानजनक वातावरण और उत्पीड़न-मुक्त माहौल सुनिश्चित करने को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। यौन उत्पीड़न, साइबर उत्पीड़न, भेदभाव, शिकायत निवारण तंत्र के प्रति जागरूकता की कमी तथा कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी जैसी समस्याएं छात्राओं और महिला कर्मचारियों को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (पोष अधिनियम) के तहत संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियों का गठन और सुरक्षित कार्य एवं अध्ययन वातावरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में अभी भी सुधार की आवश्यकता है।
कंसल्टेशन का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला सुरक्षा उपायों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना, पोष अधिनियम के कार्यान्वयन और आंतरिक समितियों की प्रभावशीलता का आकलन करना तथा शैक्षणिक संस्थानों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और कानूनी हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना है। साथ ही, सुरक्षित परिसर सुनिश्चित करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और रोकथाम रणनीतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की जाएगी।बैठक के माध्यम से नीति निर्माताओं, प्रशासकों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शिक्षकों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा तथा संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार किए जाएंगे।आयोग को उम्मीद है कि इस विचार-विमर्श से कानूनी प्रावधानों और संस्थागत जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, सुरक्षा तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली में मौजूद कमियों की पहचान होगी तथा अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, महिला-अनुकूल और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने में भी सहायता मिलेगी।