शिमला, 19 फरवरी -:हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने विभिन्न जिलों के कुल 59 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का विलय कर उन्हें सह-शिक्षा (को-एजुकेशनल) स्कूलों में बदलने का निर्णय लिया है। इसमें 38 स्कूलों का विलय पहले चरण में किया गया और शेष 21 स्कूलों को भी सह-शिक्षा में परिवर्तित किया गया।
500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी में स्थित लड़के और लड़कियों के स्कूलों को एकीकृत किया गया। शिक्षा सचिव राकेश कंवर की अधिसूचना के अनुसार शिमला और बिलासपुर के 4-4, कांगड़ा के 12, मंडी के 8, सोलन के 6 तथा हमीरपुर और चंबा के 2-2 स्कूलों का विलय किया गया। इनमें 12 पीएम मॉडल स्कूल भी शामिल हैं। सभी नवगठित सह-शिक्षा स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि सह-शिक्षा बनने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता आएगी, शिक्षक एवं स्टाफ का संतुलित तैनाती सुनिश्चित होगी, आधारभूत ढांचे का बेहतर उपयोग संभव होगा और छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का लाभ मिलेगा।विलय के बाद लीड स्कूलों के प्रधानाचार्य नवगठित सह-शिक्षा स्कूल के प्रधानाचार्य बनेंगे, जबकि अन्य स्कूलों के प्रधानाचारियों को संबंधित उपनिदेशक के कार्यालय में अगली तैनाती तक रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।दोनों विलय किए गए स्कूलों का समस्त शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय स्टाफ नवगठित स्कूल के प्रधानाचार्य के प्रशासनिक नियंत्रण में रहेगा। पूर्व छात्रा स्कूलों की भवन और अधोसंरचना का उपयोग प्रस्तावित केंद्रीय विद्यालय और स्पोर्ट्स हॉस्टल के लिए किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्टाफ के स्थानांतरण, स्वीकृत पदों का समायोजन, कार्यालय अभिलेख, स्टॉक, भूमि और भवनों के हस्तांतरण समेत सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू करें।
संक्षिप्त सूची:
विलय किए गए स्कूल: बिलासपुर, घुमारवीं, नादौन, धर्मशाला, इंदौरा, देहरा, नूरपुर, पालमपुर, ज्वाली, भंगरोटू, जोगेंद्रनगर, सरकाघाट, मंडी, अर्की, कुनिहार, नालागढ़, जुब्बल, कोटखाई, भरमौर सह-शिक्षा बनाए गए अन्य 21 स्कूल: नगरोटा बगवां, कुल्लू, नाहन, पांवटा साहिब, रामपुर, रोहड़ू, ठियोग, चंबा, आनी, ऊना और शिमला के लालपानी स्कूल इन बदलावों से हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सह-शिक्षा प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा और छात्रों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा प्रणाली का लाभ मिलेगा।