शिमला। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह क्षेत्र से भाजपा विधायक हंसराज पर दर्ज पॉक्सो एक्ट का मामला अब उच्च न्यायालय में पहुँच गया है। पीड़िता ने चंबा न्यायालय द्वारा विधायक को दी गई जमानत को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय ने विधायक हंसराज समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है। याचिका की सुनवाई के दौरान एडमिशन पर निर्णय अभी होना बाकी है।
अदालत की खंडपीठ, न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की बैंच ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता बीएल सोनी और नितिन सोनी उपस्थित रहे, जबकि राज्य की ओर से अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल जितेंद्र शर्मा पेश हुए।
अदालत ने प्रतिवादियों में राज्य, पुलिस अधीक्षक चंबा और महिला थाना चंबा के थानेदार को नोटिस तामील का उल्लेख किया और याचिकाकर्ता को एक सप्ताह में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए। यह आदेश फिलहाल प्रारंभिक प्रकृति का है और अदालत ने मामले में दोष-गुण पर कोई टिप्पणी नहीं की। अगली सुनवाई राज्य सरकार के जवाब और अन्य पक्षों की दलीलों के बाद होगी। इस मामले में विधायक हंसराज को चंबा न्यायालय ने 27 नवंबर 2025 को नियमित जमानत प्रदान की थी।
मामले का सिलसिला:
साल 2024 के अगस्त में पीड़िता ने विधायक पर अश्लील संदेश, नग्न तस्वीरें मांगने और व्यक्तिगत धमकी देने का आरोप पुलिस में दर्ज कराया। 16 अगस्त 2024 को महिला थाना चुराह में प्राथमिकी दर्ज हुई। बाद में पीड़िता ने न्यायालय में अपना बयान दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर लाइव आकर उसने आरोपों को गलतफहमी और मानसिक तनाव का परिणाम बताया।
अक्टूबर 2025 में पीड़िता ने सात मिनट से अधिक का वीडियो साझा किया, जिसमें वह रोते हुए दिखाई दी और परिवार के खिलाफ खतरों की बात कही। नवंबर 2025 में पीड़िता के पिता ने कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि बेटी को जबरदस्ती शिमला ले जाया गया, मोबाइल और फोन स्विच ऑफ कर दिया गया और उसे धमकाया गया।
7 नवंबर 2025 को पीड़िता ने वीडियो बनाकर विधायक पर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए। इसके बाद कोर्ट में बयान दर्ज हुए और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
विधायक हंसराज ने गिरफ्तारी से बचने के लिए चंबा कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की और दो सप्ताह की अंतरिम जमानत प्राप्त की। 27 नवंबर को उन्हें नियमित जमानत मिल गई। अब यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।