शिमला। हिमाचल प्रदेश में तारादेवी से शिमला तक प्रस्तावित 13.79 किलोमीटर लंबे रोपवे निर्माण परियोजना का मामला पुनः केंद्र सरकार को भेजा गया है। परियोजना की कुल लागत में वृद्धि के कारण राज्य सरकार ने वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों विभाग को मंजूरी के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। हालांकि राज्य सरकार को अपनी हिस्सेदारी और वित्तीय भार की चिंता भी सता रही है।
हिमाचल कैडर की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर इस परियोजना की सचिव हैं। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे विस्तृत चर्चा की है। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार को संशोधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन राष्ट्रीय विकास बैंक को भेजना होगा। बैंक की स्वीकृति मिलने के बाद ही परियोजना को अंतिम अनुमति मिल सकेगी।
लागत में बढ़ोतरी:
प्रारंभ में इस परियोजना की लागत 1734 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, जो अब बढ़कर 2296 करोड़ रुपये हो गई है। इस बैंक पोषित परियोजना में राज्य सरकार की हिस्सेदारी 20% है। पहले यह राशि 346.80 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 459.2 करोड़ रुपये हो गई है।
प्रदेश की वित्तीय स्थिति वर्तमान में चिंताजनक बनी हुई है। केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान समाप्त किए जाने के बाद राज्य पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या राज्य सरकार अपनी 459.2 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी वहन कर पाएगी।
तीन वर्षों से चल रहा प्रयास:
पिछले 3 वर्षों से कई अधिकारी इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। राष्ट्रीय विकास बैंक के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और निर्माण से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियां भी प्राप्त हो चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि कार्य में और देरी हुई तो लागत में और वृद्धि हो सकती है।
तारादेवी से शिमला के बीच बनने वाले इस रोपवे की लंबाई 13.79 किलोमीटर होगी। यह परियोजना शिमला शहर के 15 स्टेशनों को जोड़ेगी। निर्माण कार्य संभालने वाली कंपनी अगले 5 वर्षों तक इसकी देखरेख और मरम्मत का दायित्व भी निभाएगी। रोपवे के माध्यम से यात्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी दूरी तय कर सकेंगे।
केंद्र की स्वीकृति का इंतजार:
अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आर. डी. नजीम ने बताया कि लागत में वृद्धि के कारण विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन को संशोधित कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।