शिमला। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी संभावित हवाई सेवा शेड्यूल में राजधानी शिमला का नाम शामिल नहीं किया गया है। यह स्थिति तब है, जब शिमला के लिए नियमित उड़ानें 25 सितंबर 2025 से ही बंद पड़ी हैं। मार्च के बाद विभिन्न राज्यों के लिए नई उड़ान योजना लागू होनी है, लेकिन उसमें भी शिमला को जगह नहीं मिलने से राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात की है और हवाई सेवा बहाल करने की मांग उठाई है। राज्य सरकार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए विजिबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की राशि बाद में देने का अनुरोध भी किया है।
करीब दो महीने पहले प्रदेश मंत्रिमंडल ने बंद पड़ी हवाई सेवाओं को दोबारा शुरू करने के लिए 31.50 करोड़ रुपये की वीजीएफ स्वीकृत की थी। प्रस्ताव के तहत शिमला–धर्मशाला रूट पर 2500 रुपये किराया तय करने की बात कही गई थी, जबकि केंद्र के उपक्रम अलायंस एयर ने इसी रूट पर 3500 रुपये किराया प्रस्तावित किया था। इसी तरह दिल्ली–शिमला रूट पर वीजीएफ सीटों के लिए 6000 रुपये प्रति सीट का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
प्रदेश सरकार ने अलायंस एयर प्रबंधन को पत्र लिखकर वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों में वीजीएफ का तत्काल भुगतान करने में असमर्थता जताई है। पत्र में आश्वस्त किया गया है कि आर्थिक स्थिति सुधरने पर भुगतान किया जाएगा। हालांकि पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग और अलायंस एयर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, फिर भी उड़ान सेवा की बहाली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
गौरतलब है कि पहले राज्य सरकार सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये वीजीएफ के रूप में देती थी, लेकिन बढ़ती लागत और परिचालन खर्च के चलते यह राशि बढ़कर 31.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। अब देखना यह होगा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन पाती है या नहीं और शिमला की हवाई सेवा कब तक बहाल हो पाती है।