नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी की संभावना बढ़ गई है। 25 फरवरी 2026 को दिल्ली में नेशनल काउंसिल-जेसीएम (JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी की लंबी बैठक हुई, जिसमें वेतन आयोग को सौंपने के लिए मेमोरेंडम तैयार करने पर जोर दिया गया। लगभग दो घंटे चली इस उच्चस्तरीय चर्चा का मुख्य केंद्र सैलरी स्ट्रक्चर में व्यापक बदलाव का खाका तैयार करना था।
बैठक में प्रमुख मुद्दों में फिटमेंट फैक्टर को 3.25 तक ले जाने की मांग, न्यूनतम वेतन की नई सीमा तय करना, सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 7% करना, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और मेडिकल अलाउंस जैसे भत्तों का पुनर्गठन और निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए बेहतर वेतन पैटर्न तैयार करना शामिल था। रेलवे कर्मचारियों की यूनियन (AIRF) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि इन प्रस्तावों पर जोर देने का मकसद कर्मचारियों के वित्तीय स्तर को सुधारना और महंगाई से निपटने में मदद करना है।
साथ ही, बैठक में समानता की मांग और NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों को JCM में उचित प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता जताई। पुराने पेंशन योजना (OPS) की बहाली भी बैठक में प्राथमिकता बनी रही।
जैसा कि बैठक में निर्णय लिए गए, अगली निर्णायक बैठक 10 मार्च को होगी। इस दिन चर्चाओं को अंतिम रूप देकर संयुक्त मेमोरेंडम तैयार किया जाएगा और औपचारिक रूप से वेतन आयोग को सौंपा जाएगा। अगर फिटमेंट फैक्टर और 7% इंक्रीमेंट जैसी मांगों को मंजूरी मिलती है, तो एक साधारण चपरासी की सैलरी भी 58,500 रुपये तक पहुंच सकती है। इस फैसले से करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति और भविष्य प्रभावित होने की संभावना है।