पंचकूला I विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश में खेल ढांचे की बदहाल स्थिति को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्टेडियमों की खराब हालत, सुविधाओं की कमी और संसाधनों के अभाव का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया गया कि खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा।
खेल मंत्री गौरव गौतम ने सदन में विस्तृत जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2023 से 21 फरवरी 2026 तक खेल निदेशालय और जिला खेल विभागों को कुल 16 करोड़ 38 लाख रुपये जारी किए गए। इसमें से 8 करोड़ 29 लाख रुपये सीधे जिलों को और 8 करोड़ 9 लाख रुपये निदेशालय को दिए गए। हालांकि, 88 लाख 86 हजार 476 रुपये की राशि अब तक खर्च नहीं हो सकी।
इसी बिंदु पर कांग्रेस विधायकों आफताब अहमद, कुलदीप वत्स, विनेश फोगाट और आदित्य सुरेजवाला ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग के खाते में धन उपलब्ध है तो सुविधाओं की कमी का हवाला क्यों दिया जाता है। उनका आरोप था कि अधिकारी न तो जनप्रतिनिधियों की सुनते हैं और न ही उपलब्ध बजट का समय पर उपयोग करते हैं, जिससे खिलाड़ियों को नुकसान उठाना पड़ता है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर यह राशि लैप्स होने की आशंका भी जताई गई।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, पंचकूला को सर्वाधिक और नूंह को सबसे कम राशि आवंटित की गई। कई जिलों में स्वीकृत धनराशि का पूरा उपयोग न हो पाना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष ने मांग की कि खेल बजट का पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिल सकें।