समर एक्सप्रेस,हमीरपुर -: शिमला में जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री 1 मार्च को दिल्ली दौरे पर गए थे और तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 2 मार्च को शिमला लौटना था, लेकिन वे निर्धारित समय पर वापस नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि करीब 24 घंटे तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राणा ने आरोप लगाया कि इस दौरान मुख्यमंत्री दिल्ली के एक होटल में ठहरे रहे और वहीं राज्यसभा सीट को लेकर अहम चर्चाएं हुईं। उन्होंने कहा कि यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि इससे पहले विदेश में भी इस सीट को लेकर बातचीत हुई थी और बाद में दिल्ली में बैठक के दौरान उस पर अंतिम फैसला लिया गया।उन्होंने कांग्रेस द्वारा घोषित प्रत्याशी को ‘आम कार्यकर्ता’ बताए जाने पर भी सवाल उठाए। राणा ने कहा कि जिस व्यक्ति को साधारण कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वह करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक है और उसके पास कई लग्जरी वाहन भी हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह दावा जनता को गुमराह करने जैसा है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि चुनावी हलफनामे में भी कुछ वित्तीय आंकड़ों को लेकर विसंगतियां सामने आने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार संपत्ति के विवरण में अंतर दिखाई दे रहा है, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि घोषित संपत्ति करोड़ों रुपये में बताई गई है और इसका स्पष्ट विवरण सामने आना चाहिए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति को सरकार के कार्यकाल के दौरान कई बड़े टेंडर दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक पक्षपात और नजदीकी के आरोप भी लग रहे हैं। राणा ने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता जरूरी है ताकि जनता के बीच किसी तरह की शंका न रहे।
राजेंद्र राणा ने चुनाव आयोग से पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लेनदेन की आशंका सामने आती है तो इस पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।