Summer Express , तेहरान | मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि खाड़ी के अरब देशों पर हमले जारी रहे तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सऊदी सरकार का कहना है कि ऐसे हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता और देशों के बीच संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है।
यह बयान हाल ही में हुए ड्रोन हमले के बाद सामने आया है, जिसमें सऊदी अरब के विशाल शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान ने खाड़ी के अरब देशों पर हमले रोक दिए हैं, लेकिन मौजूदा घटनाओं से यह दावा गलत साबित हुआ है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार हमले बिना किसी स्पष्ट कारण के जारी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। सऊदी अरब ने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति जारी रही तो इसका असर मौजूदा और भविष्य के कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
इसी बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिला है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हाल ही में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। यह फैसला ईरान की धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने एक सप्ताह से अधिक चली बैठकों के बाद लिया।
56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था। उन्हें ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के करीबी नेताओं में गिना जाता है। हालांकि उनके चयन को लेकर देश के भीतर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है।
कुछ राजनीतिक नेताओं और विश्लेषकों का कहना है कि सर्वोच्च नेता का पद वंशानुगत रूप से दिए जाने से इस्लामी गणराज्य की मूल भावना पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं धार्मिक नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों में मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता की तुलना में अधिक कठोर रुख अपना सकते हैं। अब उनके पास ईरान की सशस्त्र सेनाओं और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने का अधिकार होगा। बताया जा रहा है कि हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिकी हमलों में ईरान के कुछ परमाणु ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं, हालांकि देश के पास अभी भी संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार मौजूद है।
इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजराइल ने पहले ही संकेत दिया है कि ईरान का नया सर्वोच्च नेता भी उसके संभावित निशानों में शामिल हो सकता है। वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दे।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और ईरान समर्थित लेबनानी संगठन हिज्बुल्लाह ने मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व का समर्थन किया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं से मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और संघर्ष और अधिक बढ़ सकता है।