Summer Express, नई दिल्ली | नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने डार्कनेट के जरिए संचालित एक बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि ‘टीम कल्कि’ नाम से चल रहा यह नेटवर्क जनवरी 2025 से देशभर में 1,000 से अधिक नशीले पदार्थों के पार्सल भेज चुका है। तस्करी के इस नेटवर्क में लेनदेन को छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था।
एनसीबी के अनुसार कार्रवाई के दौरान नीदरलैंड से आए दो पार्सलों के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से जब्त किए गए कुल 13 पार्सलों से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए। इनमें 2,338 एलएसडी ब्लॉट, 160 एमडीएमए (एस्टेसी) की गोलियां, करीब 73 ग्राम चरस, 3.64 ग्राम एम्फैटेमिन और लगभग 3.6 किलोग्राम तरल एमडीएमए शामिल है। जब्त ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब पांच करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक इन नशीले पदार्थों का इस्तेमाल आमतौर पर रेव पार्टियों और नाइट क्लबों में किया जाता है। इस मामले में तीन महीने तक गुप्त निगरानी के बाद अनुराग ठाकुर और विकास राठी को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला कि दोनों नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी में मौजूद डार्कनेट विक्रेताओं से एलएसडी और एमडीएमए मंगाते थे।
ग्राहकों के ऑर्डर डार्क वेब फोरम ‘ड्रेड’ और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन ‘सेशन’ के जरिए प्राप्त किए जाते थे, जिससे डिजिटल पहचान को छिपाना आसान हो जाता था। एनसीबी के अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क का संचालन बेहद संगठित तरीके से किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली के कुछ इलाकों में ड्रग्स की सप्लाई के लिए ‘डेड ड्रॉप’ डिलीवरी सिस्टम अपनाया जाता था। इस पद्धति में नशीले पदार्थ सीधे ग्राहक को देने के बजाय पहले से तय स्थानों पर रख दिए जाते थे, जहां से ग्राहक उन्हें उठा लेते थे।
एनसीबी के मुताबिक देशभर में पार्सल भेजने के लिए मुख्य रूप से स्पीड पोस्ट (इंडिया पोस्ट) और अन्य कूरियर सेवाओं का उपयोग किया जाता था। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है।