Summer Express, चंडीगढ़ | हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और छात्र-शिक्षक अनुपात को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत तय मानकों के अनुसार विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में दिए गए आदेश के बावजूद सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब दाखिल न किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं।
अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) को निर्देश दिया है कि वे 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इस हलफनामे में सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट ब्यौरा देना होगा।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि फरीदाबाद, नूंह और पलवल को छोड़कर अन्य जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात मानकों के अनुसार है। हालांकि अदालत ने पाया कि प्रस्तुत आंकड़े शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने अतिरिक्त और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कितने विशेष शिक्षक तैनात हैं, स्कूल भवन आरटीई मानकों के अनुरूप हैं या नहीं, तथा स्कूलों में लाइब्रेरी, खेल सामग्री और शिक्षण-अधिगम उपकरणों की स्थिति क्या है।
इसके अलावा अदालत ने 9 अगस्त 2024 को जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन के तहत चल रही भर्ती प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति भी बताने को कहा है। दरअसल कोर्ट ने एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें दावा किया गया था कि कुछ जिलों में 500 छात्रों पर केवल एक शिक्षक कार्यरत है।
अदालत ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत तय मानकों का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।