समर एक्सप्रेस /मंडी, धर्मवीर -:सरकारी नौकरी में अक्सर लोगों पर ढिलाई या लापरवाही के आरोप लगते रहते हैं, लेकिन कुछ कर्मचारी ऐसे भी होते हैं जो अपने काम को केवल नौकरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम मानते हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में कार्यरत कंडक्टर ललित राजपूत भी ऐसे ही कर्मचारियों में शामिल हैं, जिनका निगम के प्रति समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
मंडी जिला के गोहर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले बागा गांव के रहने वाले 35 वर्षीय ललित राजपूत वर्तमान में एचआरटीसी के मंडी डिपो में कंडक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने केलांग डिपो से अपनी सेवाओं की शुरुआत की थी। शुरुआत में कौशल विकास योजना के तहत काम करते हुए उन्हें मात्र पांच हजार रुपये मेहनताना मिलता था। हालांकि बाद में उन्होंने एचआरटीसी की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 2018 से बतौर कंडक्टर नियमित सेवाएं देना शुरू कर दिया।ललित राजपूत का कहना है कि एचआरटीसी ही वह माध्यम है जिसकी वजह से उनका घर-परिवार चल रहा है। इसी वजह से वे निगम के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करना अपना कर्तव्य मानते हैं। उनका मानना है कि जिस संस्था से परिवार का पालन-पोषण होता है, उसके प्रति समर्पण होना जरूरी है। यही भावना उन्हें दिन-रात अपने काम को पूरी जिम्मेदारी के साथ करने के लिए प्रेरित करती है।
ललित राजपूत का एचआरटीसी के प्रति समर्पण इतना गहरा है कि वे निगम के खिलाफ किसी की भी गलत टिप्पणी सहन नहीं कर पाते। कई बार ऐसा भी हुआ है कि जब किसी ने एचआरटीसी के बारे में गलत बातें कही तो उन्होंने इसका विरोध किया। इतना ही नहीं, निगम के खिलाफ अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ उन्होंने पुलिस में शिकायतें भी दर्ज करवाई हैं। हालांकि इसी कारण कई विरोधियों ने भी उनके खिलाफ झूठी शिकायतें और मामले दर्ज करवाए हैं, लेकिन ललित राजपूत इन चुनौतियों से पीछे हटने के बजाय अपने कर्तव्य को और मजबूती से निभा रहे हैं।
एचआरटीसी के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए निगम की ओर से उन्हें तीन बार सम्मानित भी किया जा चुका है। खासतौर पर कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर उनके द्वारा बनाया गया एक वीडियो पूरे प्रदेश में काफी वायरल हुआ था, जिसने यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को डिजिटल भुगतान के प्रति जागरूक किया।
ललित राजपूत ने एचआरटीसी के प्रचार-प्रसार के लिए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी पूरी तरह समर्पित कर दिया है। वर्ष 2018 में उन्होंने अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट का नाम बदलकर “एचआरटीसी केलांग” रख दिया। बाद में जब उनका तबादला मंडी हुआ तो इसका नाम “एचआरटीसी केलांग मंडी” कर दिया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से वे लगातार एचआरटीसी से जुड़ी जनहित की जानकारी, यात्रियों के लिए जरूरी सूचनाएं और जागरूकता से संबंधित पोस्ट साझा करते रहते हैं। उनके इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लाखों लोग जुड़े हुए हैं।
अपने सेवा काल के दौरान ललित राजपूत ने हिमाचल के कई दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं दी हैं। केलांग, पांगी, चंबा, भरमौर, नाहन और कुल्लू जैसे क्षेत्रों में काम करने के बाद अब वे मंडी डिपो में सेवाएं दे रहे हैं। इन इलाकों में बस सेवाएं देना अक्सर कठिन परिस्थितियों में होता है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है।
दिलचस्प बात यह भी है कि एचआरटीसी में आने से पहले ललित राजपूत चंडीगढ़ में एक कॉल सेंटर में काम करते थे। लेकिन एचआरटीसी में आने के बाद उन्होंने इस नौकरी को सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि सेवा का माध्यम मान लिया।आज ललित राजपूत का जज्बा यह साबित करता है कि अगर कोई कर्मचारी अपने काम के प्रति सच्ची निष्ठा और समर्पण रखे, तो वह न केवल अपने संस्थान बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।