Summer express /हमीरपुर, अरविन्द -:हमीरपुर जिले के राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बडू में छात्रों के अचानक बीमार पड़ने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआत में इसे दूषित पानी से जोड़कर देखा गया, लेकिन अब पानी की जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बाद असली कारणों को लेकर संशय और भी बढ़ गया है। 20 से अधिक छात्रों में पीलिया, उल्टी और संक्रमण जैसे लक्षण पाए जाने से पूरे परिसर में डर और चिंता का माहौल बन गया है।
घटना के सामने आने के बाद छात्र संगठनों और अभिभावकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते साफ-सफाई और निगरानी पर ध्यान दिया जाता, तो हालात इतने खराब नहीं होते। संस्थान में लगे पानी के टैंकों की नियमित सफाई और रखरखाव को लेकर भी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।
छात्र संगठन एबीवीपी के पदाधिकारियों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक सामान्य चूक नहीं, बल्कि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा जोखिम है। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने मूलभूत सुविधाओं को नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। संगठन ने यह भी बताया कि एक छात्र की हालत काफी बिगड़ गई थी, जिसे पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन सुधार न होने पर उसे चंडीगढ़ के बड़े अस्पताल में रेफर करना पड़ा, जहां उसका इलाज जारी है।
दूसरी ओर, संस्थान के प्रशासन का कहना है कि जैसे ही छात्रों के बीमार होने की सूचना मिली, तुरंत संबंधित विभागों से संपर्क किया गया। पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट में पानी सुरक्षित पाया गया है। इसके बावजूद छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं रुक नहीं रही हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब केवल पानी ही नहीं, बल्कि अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है। इसमें भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था, सीवरेज सिस्टम और आसपास के पर्यावरणीय कारकों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि सही कारण सामने आ सके।
इस घटना ने संस्थान की व्यवस्थाओं और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और उनके परिवारों में चिंता बनी हुई है, वहीं प्रशासन पर जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इतने छात्रों के बीमार होने की असली वजह क्या है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।