Summer Express,बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ में चार वर्षीय आयुष के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में प्रशासनिक खामियों के कारण घंटों तक देरी हुई। आयुष की बीमारी से मौत हुई थी, लेकिन परिवार पोस्टमॉर्टम करवाने के पक्ष में नहीं था। अस्पताल प्रशासन ने कानून की मजबूरी का हवाला देते हुए शव देने से इंकार कर दिया।
घटना की पेचीदगियों में यह भी सामने आया कि मामला दिल्ली क्षेत्र का था, इसलिए सूचना रात के बजाय सुबह दी गई। इसके चलते पुलिस भी तुरंत पोस्टमॉर्टम के लिए उपस्थित नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप, मृतक आयुष के परिवार को शव लेने के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ा।
परिवार बिहार के गोपालगंज जिले के बरौली का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली के टीकरी बार्डर इलाके में रहता है। आयुष जन्म से ही दिव्यांग था और उनके पिता विजय प्रताप निजी कामकाजी हैं। आयुष परिवार के पांच बच्चों में चौथे नंबर पर था।
स्वजनों ने अस्पताल अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया कि पोस्टमॉर्टम न किया जाए, लेकिन नियम के अनुसार शव नहीं दिया जा सका। अस्पताल से दिल्ली पुलिस को सूचना सुबह दी गई, लेकिन दोपहर तक कोई पुलिसकर्मी पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के लिए उपस्थित नहीं हुआ। परिवार ने दिनभर अस्पताल में इंतजार किया और कई बार फोन के जरिए स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की।
मृतक की मां ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि सुबह पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन दोपहर तक किसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि शव कब उपलब्ध होगा। इस घटना ने अस्पताल और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय में खामियों को उजागर किया है।