Summer Express, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के एक प्रमुख बी1 पुल को निशाना बनाए जाने के बाद हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं। इस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाते हुए खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण ढांचों को संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल कर लिया है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने खाड़ी देशों और जॉर्डन के आठ प्रमुख पुलों को अपनी हिट-लिस्ट में शामिल किया है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका को और गहरा कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह समुद्री पुल, संयुक्त अरब अमीरात के शेख जायद, अल मकता और शेख खलीफा पुल, सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे, तथा जॉर्डन के किंग हुसैन, दामिया और अब्दौन पुल शामिल हैं। इन सभी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ढांचे माना जाता है।
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को सख्त चेतावनी दी गई थी। इसके बाद हुए हमलों में ईरान के निर्माणाधीन बी1 पुल को आंशिक नुकसान पहुंचा है। यह पुल 136 मीटर ऊंचा है और तेहरान को कराज शहर से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 95 लोग घायल हुए हैं। बताया गया है कि हमले के समय आसपास लोग किसी स्थानीय आयोजन के लिए एकत्रित थे, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ गई।
वहीं, अमेरिका की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ट्रंप ने हमले के बाद चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि ईरान वार्ता के लिए तैयार नहीं होता, तो आगे और कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि ईरान का एक बड़ा पुल अब उपयोग योग्य नहीं रहा और भविष्य में और नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिक ढांचों पर हमले देश को झुकने पर मजबूर नहीं कर सकते। उन्होंने इसे विरोधियों की विफलता और कमजोर होती स्थिति का संकेत बताया।