Summer express, नई दिल्ली | भारत में अप्रैल माह के दौरान पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर मौसम और जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रभाव देखने को मिल सकता है। तेज गर्मी, उमस, बारिश और तूफानी परिस्थितियां मतदान की प्रक्रिया और मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे वोटिंग पैटर्न में बदलाव संभव है।
इस दौरान पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इन राज्यों में कुल 824 विधानसभा क्षेत्र और 2.19 लाख से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 25 लाख से ज्यादा चुनावी कर्मचारी तैनात रहेंगे।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल का महीना सामान्यतः गर्मी और प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत का समय होता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस अवधि के दौरान मौसम के पैटर्न में बदलाव देखा गया है। तापमान में लगातार वृद्धि, असमान बारिश और तूफानों की बढ़ती घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेष रूप से पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में ‘नॉरवेस्टर’ या ‘काल बैसाखी’ जैसे तेज तूफान मतदान के दौरान बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। इन तूफानों के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना रहती है, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और कई क्षेत्रों में मतदाता मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल में बढ़ती गर्मी और नमी भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण ‘वेट-बल्ब’ जैसी खतरनाक परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो मतदाताओं के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं और मतदान प्रतिशत को प्रभावित कर सकती हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अप्रैल महीने का तापमान सामान्य से अधिक रहा है और मौसम में अस्थिरता बढ़ी है। वर्ष 2022 में अप्रैल का तापमान औसत से 1.36 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था, जबकि इसके बाद के वर्षों में बारिश और तूफानों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
इन बदलते हालात को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी व्यवस्थाओं में बदलाव किए हैं। मतदान का समय आमतौर पर सुबह 7 बजे से शाम तक निर्धारित किया गया है, ताकि मतदाता दिन के सबसे गर्म समय से बचकर मतदान कर सकें। इसके अलावा, भीड़ नियंत्रण के लिए रियल-टाइम पोलिंग स्टेशन ट्रैकिंग और कुछ विशेष श्रेणियों के लिए घर से मतदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं जैसे चुनावों को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने लगा है। अप्रैल 2026 के चुनावों में मौसम एक अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।