महेंद्रगढ़ | महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में भीषण गर्मी के बीच दमकल विभाग गंभीर संकट से जूझ रहा है। जिले में तैनात 60 कर्मचारियों में से 40 कर्मचारी पिछले 13 दिनों से हड़ताल पर हैं, जिसके चलते आग बुझाने की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। अब पूरे जिले की जिम्मेदारी केवल 20 नियमित कर्मचारियों के हवाले है, जिससे किसी भी बड़ी आग की स्थिति में हालात बेकाबू होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने फिलहाल रोडवेज विभाग से 10 चालकों की तैनाती कर व्यवस्था को आंशिक रूप से संभालने की कोशिश की है, लेकिन प्रशिक्षित फायर स्टाफ की कमी अब भी गंभीर समस्या बनी हुई है।
जिले में कुल 8 दमकल गाड़ियां और 1 रेस्क्यू वाहन मौजूद हैं, जो पहले से ही सीमित संसाधन हैं। इनमें नारनौल और महेंद्रगढ़ में तीन-तीन गाड़ियां, जबकि कनीना, अटेली और नांगल चौधरी में एक-एक गाड़ी तैनात है। किसी एक क्षेत्र में आग लगने पर अन्य इलाकों में तुरंत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो जाता है। हालात यह हैं कि नए फायर स्टेशन शुरू होने के बावजूद वहां न तो पर्याप्त वाहन हैं और न ही पूरा स्टाफ, जिसके कारण वे अभी भी पुराने संसाधनों पर निर्भर हैं।
पिछले वर्ष जिले में करीब 570 आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई थीं और गर्मी बढ़ने के साथ यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। खेतों, गोदामों और आबादी वाले क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण दमकल विभाग की प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आग की स्थिति में शुरुआती 10 से 15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के कारण मौके पर समय पर पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है।
फायर विभाग के अधिकारियों ने छह नई दमकल गाड़ियों और अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है, लेकिन फिलहाल व्यवस्था अस्थायी रूप से ही चल रही है। विभाग का कहना है कि गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ने के कारण कर्मचारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रखा गया है, लेकिन मौजूदा स्थिति में पूरी सुरक्षा व्यवस्था दबाव में है।