शिमला, संजू -: केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं ने “आलू वैल्यू चेन को मजबूत बनाने” पर विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाना था।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट ने अपने संबोधन में रसायन मुक्त खेती को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग न केवल किसानों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी कमजोर करता है। उन्होंने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनुसंधान आधारित तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद किसानों की जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों और उन्नत किस्मों पर काम कर रही है। सीपीआरआई द्वारा अब तक 50 से अधिक उन्नत आलू किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जो देश-विदेश में उपयोग हो रही हैं।सम्मेलन में आलू फसल में बीमारियों की चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई। संस्थान एयरोपोनिक तकनीक के माध्यम से वायरस मुक्त बीज उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। जलवायु परिवर्तन को भी आलू उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती माना गया, जिसके समाधान के लिए नई जलवायु अनुकूल किस्मों पर शोध जारी है।इसके अलावा बीज उत्पादन, फसल सुरक्षा, भंडारण, प्रोसेसिंग और विपणन से जुड़े मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया।