Summer express/शिमला, संजू -:शिमला शहर में स्वच्छता व्यवस्था एक बड़े संकट के दौर से गुजर रही है। नगर निगम शिमला के अंतर्गत कार्यरत सेहब कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल का असर शहर में पहले ही दिन साफ दिखाई देने लगा, जहां कई इलाकों से कूड़ा नहीं उठाया गया। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण के अहम समय पर शुरू हुई यह हड़ताल नगर निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
सेहब कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को नियमों के अनुसार 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि मिलनी चाहिए, लेकिन लंबे समय से उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखी गईं, मगर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अब वे आर-पार की लड़ाई के लिए मजबूर हो चुके हैं।जसवंत सिंह ने जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए ESMA को भी गलत बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और प्रशासन दबाव बनाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों के लिए नौकरी तक गंवाने को तैयार हैं, लेकिन पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब जनता से हर साल 10 प्रतिशत तक शुल्क वसूला जा रहा है तो कर्मचारियों को उसी अनुपात में वेतन लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
वहीं, सीटू के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को संगठन का भी खुला समर्थन मिल रहा है। सीटू राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर पहले से समझौता वार्ता चल रही थी, इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन से 10 प्रतिशत की कटौती कर दी गई, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जब कोई मामला लेबर ऑफिस में विचाराधीन हो तो उस दौरान कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता।विजेंद्र मेहरा ने कहा कि कर्मचारियों ने हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस भी दिया था, इसलिए इस स्थिति में ESMA लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जबरदस्ती आंदोलन को दबाने की कोशिश की तो इसका व्यापक विरोध होगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आईजीएमसी, होटल उद्योग, रेहड़ी-फहड़ी यूनियन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित शहर की सभी सीटू समर्थित यूनियनें भी हड़ताल पर जा सकती हैं। इससे शहर की स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है।
सीटू नेताओं ने नगर निगम पर जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि शहर में पानी, कूड़ा और प्रॉपर्टी टैक्स के बिल लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे आम लोग पहले ही परेशान हैं। उन्होंने जनता से भी इस मुद्दे पर कर्मचारियों का समर्थन करने की अपील की।हड़ताल का असर अब आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी पड़ने लगा है। शहर के कई क्षेत्रों में कूड़ा न उठने से लोगों में चिंता बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो शहर में गंदगी फैल सकती है, जिससे पर्यटन नगरी शिमला की छवि को नुकसान पहुंचेगा। खासकर पर्यटन सीजन और स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान ऐसी स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।अब सभी की निगाहें प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई हैं। लोगों को उम्मीद है कि दोनों पक्ष जल्द बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालेंगे ताकि शहर की सफाई व्यवस्था सामान्य हो सके और हालात ज्यादा न बिगड़ें।