Summer express, राकेश कुमार शर्मा, , करनाल। अब मसाले केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वास्थ्य सुधार और किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। करनाल स्थित महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय बीजीय मसालों की ऐसी उन्नत किस्मों पर शोध कर रहा है, जिनमें औषधीय गुणों की मात्रा अधिक होगी और जो किसानों के लिए कम लागत में बेहतर मुनाफे का जरिया बन सकेंगी।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हल्दी, मेथी, सौंफ और अजवाइन जैसी फसलों की नई किस्में विकसित कर रहे हैं। इन किस्मों में ऐसे तत्वों को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मसाले केवल रसोई की जरूरत नहीं हैं, बल्कि कई बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शुगर नियंत्रण और पाचन सुधार पर फोकस
विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की जा रही मेथी की नई किस्म में ट्रेगोनेलाइन तत्व की मात्रा अधिक पाई गई है, जिसे रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक माना जाता है। वहीं सौंफ और अजवाइन की नई किस्मों में वाष्पशील तेल की मात्रा बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिससे पाचन तंत्र को लाभ मिलने की संभावना है। हल्दी की उन्नत किस्मों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय जलवायु के अनुकूल गुणों को भी शामिल किया गया है।
गेहूं-धान के विकल्प के रूप में मसाला खेती
विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में घटते भूजल स्तर और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच मसाला फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी और कम निवेश की जरूरत होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है। इसी कारण विश्वविद्यालय फसल विविधीकरण की रणनीति के तहत मसाला खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।
प्राकृतिक खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
विश्वविद्यालय प्राकृतिक और जैविक खेती के मॉडल विकसित करने पर भी काम कर रहा है। जीवामृत, ब्रह्मास्त्र और अन्य प्राकृतिक इनपुट्स के उपयोग के माध्यम से फलों, सब्जियों, मसालों और औषधीय पौधों को एकीकृत कर टिकाऊ कृषि प्रणाली तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराना है, जिससे उत्पादन बढ़े और स्वास्थ्यवर्धक कृषि उत्पाद भी तैयार हों।
14 नए बागवानी विज्ञान केंद्र होंगे स्थापित
किसानों तक नई तकनीक और शोध परिणाम पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय प्रदेश के विभिन्न जिलों में 14 नए बागवानी विज्ञान केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह और अनुसंधान आधारित जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
जल्द उपलब्ध होंगे नए बीज
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने बताया कि नई किस्मों को विकसित कर किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में समय लगता है। सौंफ और मेथी की उन्नत किस्मों के बीज अगले सीजन तक किसानों को उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है, जबकि हल्दी की नई किस्म को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में अभी कुछ समय लगेगा। अगले एक से दो वर्षों में किसानों को इन शोधों का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रही तो हरियाणा में खेती का स्वरूप बदल सकता है और किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों से भी बेहतर आय अर्जित कर सकेंगे।