Summer express, अहमदाबाद | अहमदाबाद-लंदन उड़ान के दौरान हुए एयर इंडिया विमान हादसे को लेकर जांच के बीच नया विवाद सामने आया है। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अमेरिकी वकील माइक एंड्रयूज ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आई ‘पायलट सुसाइड’ थ्योरी को खारिज करते हुए दावा किया है कि विमान में पहले से मौजूद तकनीकी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खामियां दुर्घटना का प्रमुख कारण हो सकती हैं।
माइक एंड्रयूज का कहना है कि उनकी स्वतंत्र जांच में ऐसे कई संकेत मिले हैं, जो विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। उनके मुताबिक, दुर्घटना से पहले ही विमान में तकनीकी चेतावनी संकेत दिखाई दे रहे थे और उड़ान भरने से पहले कुछ महत्वपूर्ण प्रणालियों में असामान्य गतिविधियां दर्ज की गई थीं।
वकील ने दावा किया कि हादसे के वीडियो और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि विमान की रैम एयर टरबाइन (RAT) रनवे पर ही सक्रिय हो गई थी, जो सामान्य परिस्थितियों में आपात स्थिति में ही काम करती है। उनका कहना है कि यह स्थिति किसी संभावित इलेक्ट्रिकल फेलियर या सिस्टम खराबी की ओर संकेत करती है।
एंड्रयूज के अनुसार, विमान के ट्रांसपोंडर में भी उड़ान से पहले तकनीकी समस्या सामने आई थी। उनका दावा है कि हादसे से जुड़े कई पहलू ऐसे हैं, जिन्हें केवल पायलट की गलती या आत्महत्या की थ्योरी से नहीं समझाया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विमान में अतीत में तकनीकी खराबियों की शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं और उसके इलेक्ट्रिकल पैनल में बदलाव भी किया गया था।
लॉ फर्म द्वारा कराए गए फ्लाइट सिमुलेशन विश्लेषण में भी टेक-ऑफ प्रक्रिया सामान्य से धीमी बताए जाने का दावा किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति कम थ्रस्ट, ब्रेक ड्रैग या अन्य तकनीकी कारणों से उत्पन्न हो सकती है। वकील का कहना है कि उपलब्ध आंकड़े इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेलियर की संभावना को मजबूत करते हैं।
उधर, विमान हादसे की जांच कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां कर रही हैं। जांच में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), अमेरिका का नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB), ब्रिटेन की एयर एक्सीडेंट्स इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (AAIB), अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA), डीजीसीए, विमान निर्माता बोइंग और इंजन निर्माता जीई एयरोस्पेस सहित कई विशेषज्ञ संस्थाएं शामिल हैं।
वहीं, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में सावधानी बरतने की मांग की है। मामले की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों पर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।