Summer express, मोनिका रावत, चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले और धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशालय के पूर्व सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी 10 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई |
ईडी के अनुसार जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, यूटी चंडीगढ़ प्रशासन तथा चंडीगढ़ और पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया गया। मामले में विक्रम वाधवा को मुख्य आरोपियों में शामिल माना गया है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर कथित रूप से इस घोटाले को अंजाम दिया।
जांच एजेंसी के मुताबिक नरेश कुमार को सरकारी धन की हेराफेरी के लिए इस्तेमाल की गई शेल कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से सीधे रकम प्राप्त हुई। ईडी का दावा है कि नरेश कुमार ने न केवल अपने और परिवार के बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित राशि प्राप्त की, बल्कि धन के हस्तांतरण, परतें बनाने (लेयरिंग) और उसे छिपाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा उसे बड़ी मात्रा में नकदी भी पहुंचाई गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आर.एस. ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई मध्यस्थ शेल कंपनियों के खातों में सरकारी विभागों से सीधे धनराशि भेजी गई। बाद में इन पैसों को विभिन्न खातों के जरिए घुमाया गया। ईडी के अनुसार सैकड़ों करोड़ रुपये ज्वैलर्स को ट्रांसफर किए गए, जिनसे बैंकिंग लेनदेन के बदले नकदी प्राप्त की गई और फिर यह नकदी विभिन्न सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
ईडी ने नरेश कुमार को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 जून तक चार दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इससे पहले इस मामले में रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने कहा है कि धन के पूरे प्रवाह (मनी ट्रेल), अन्य लाभार्थियों और इस राशि से खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।