Summer express, अमृतसर। पंजाब में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, एक जुलाई से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय होने जा रही हैं, जिसके प्रभाव से कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सोमवार को पंजाब के कई जिलों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। बठिंडा प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा फरीदकोट और फाजिल्का में 41 डिग्री, फिरोजपुर में 40.7 डिग्री, रूपनगर में 40.6 डिग्री तथा पटियाला में 39.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं, अमृतसर में 37.9 डिग्री, लुधियाना में 37.8 डिग्री और पठानकोट में 36.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार 30 जून को प्रदेश में किसी प्रकार की विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, कुछ इलाकों में आंशिक बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है।
एक जुलाई से प्री-मानसून गतिविधियों के सक्रिय होने के साथ ही अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, मोहाली, पटियाला, संगरूर और पठानकोट सहित कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि दो जुलाई को भी उत्तर, मध्य और पूर्वी पंजाब के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा भी हो सकती है। हालांकि, फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर, मोगा, फरीदकोट, बठिंडा, मानसा और बरनाला जैसे दक्षिण-पश्चिमी जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने की संभावना है।
तीन जुलाई को भी प्रदेश के अधिकांश मध्य, उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इससे तापमान में और गिरावट आने के आसार हैं, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून की सक्रियता से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। लगातार बादल छाने और रुक-रुककर होने वाली बारिश से न केवल तापमान में कमी आएगी, बल्कि किसानों, आम नागरिकों और बिजली की बढ़ती मांग पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।